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सबमें मिलती है

अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर(मध्यप्रदेश)
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हिन्दी संग हम….

हिन्दी हैं हम
है मान शान जान
इससे दम।

हिन्दी बढ़ाओ
मूल्य बढ़े इसका
सदा चलेगी।

भाषा अनूठी
अनेक विशेषता
मन जोड़ती।

हमारी जान
यह देश की भाषा
जगाए आशा।

इसे फैलाओ
भाषा पहचान है
मान दिलाओ।

सारी दुनिया
हिन्दी भाषा से जुड़ी
हम भी बोलें।

लड़े न हिन्दी
सबमें मिलती है
भाषा है मीठी।

शिशु भी बोले
बड़ी सहज-सरल
सबको जोड़े।

है प्यारी-न्यारी
लिखा-बोला समान
अंतर नहीं।

ज्ञान है हिन्दी
अभिमान हमारा
भाल की बिन्दी।

जिन्दगी हिन्दी
बहुत सिखाती हिन्दी
मिलाती हिन्दी।

सदाबहार
मातृभाषा निराली
करना प्यार।

देश का मान
पसंद विश्व में भी
मिला सम्मान।

हिन्दी समुद्र
सबके संग मिले
साथ न छोड़े।

हो एकजुट
फहरा दो यूँ ध्वज
हिन्दी अमिट।

गर्वित होना
साहित्य-संस्कृति
रक्षा करना।

राष्ट्र प्रतीक
तीसरी बड़ी भाषा
समझो बात।

हो राष्ट्रभाषा
बने व्यवहार में
सबकी आशा।

न हो उपेक्षा
विश्व को महकाए
सबकी इच्छा॥