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सरस्वती वंदना

दीपेश पालीवाल ‘गूगल’ 
उदयपुर (राजस्थान)
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जय हो माँ शारदे माँ मेरी शारदे,
हर ले मन के तिमिर को,मुझे ज्ञान दे…।

कामना मेरी इतनी सी है मेरी माँ,
सत्य को लिखकर सत्य पर चलता रहूँ।
न मैं धन चाहूँ न और चाह भी नाम की,
लेखनी हो मेरी राष्ट्र सम्मान की।
जय हो माँ…॥

बन्ध न जानूं न ज्ञान छंदों का है,
अलंकार भी रूठे हाल द्वन्दों का है।
विपदा आई है माँ,विपदा मिटा दो मेरी,
प्रज्ञा कम है,थोड़ी बढ़ा दो मेरी।
जय हो माँ…॥

ऐसा वर दो मुझे माँ मेरी शारदे,
ज्ञान की ज्योत मुझमें भर दो शारदे।
राष्ट्र को लिखते मैया में बढ़ता रहूँ,
नित-नए गीत प्यारे मैं लिखता रहूँ।
जय हो माँ…॥