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सावन…

ममता तिवारी ‘ममता’
जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)
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तुम्हारे आगमन की प्रतीक्षा में,
कब से उत्सुक थे
प्रकृति को प्यार करने वाले,
कलमकार,चित्रकार,शिल्पकार,काश्तकार…
और प्यार में जीने वाले दिल,
आखिर तुम आ ही गए।

तुमसे हर किसी को लगाव है,
तुम्हारी उपहारों वाली झोली को देख रहे हैं
तुम अब मुँह खोलोगे पोटली का,
और लोगों को बांटोगे
झूले,कजरी,छतरी,हरियाली,बूंदें, बहार, बौछार, त्यौहार…
लेकिन सभी तुम्हारे चाहने वाले नहीं,
और कोसेंगे बाढ़, कीचड़, बीमारी, गंदगी आपदा के लिए।

कुछ अनपेक्षित, नकार, विरोध, प्रतिशोधजीवी,
तुम्हारे उपहारों के चुन-चुन कर चीथड़े उड़ाएंगे…
तुम कभी लेकिन हताश नहीं होते,
बाँटते रहते हो बरसते-हरसते
और बांटते रहना।
तुम्हारे चाहने वाले,
बहुत हैं यार…॥

परिचय–ममता तिवारी का जन्म १अक्टूबर १९६८ को हुआ है। वर्तमान में आप छत्तीसगढ़ स्थित बी.डी. महन्त उपनगर (जिला जांजगीर-चाम्पा)में निवासरत हैं। हिन्दी भाषा का ज्ञान रखने वाली श्रीमती तिवारी एम.ए. तक शिक्षित होकर समाज में जिलाध्यक्ष हैं। इनकी लेखन विधा-काव्य(कविता ,छंद,ग़ज़ल) है। विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित हैं। पुरस्कार की बात की जाए तो प्रांतीय समाज सम्मेलन में सम्मान,ऑनलाइन स्पर्धाओं में प्रशस्ति-पत्र आदि हासिल किए हैं। ममता तिवारी की लेखनी का उद्देश्य अपने समय का सदुपयोग और लेखन शौक को पूरा करना है।