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सीखने का नाम ही विद्यार्थी जीवन

अमृता धनंजय यादव
मुम्बई (महाराष्ट्र)
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मेरा विद्यार्थी जीवन स्पर्धा विशेष …….

जीवन का सबसे उत्साह और उमंगमय भरा समय विद्यार्थी जीवन होता है,क्योंकि इन दिनों हम दिमाग के एक कोने मे शरारतें तो दूसरे में सपने बुनते हैं। डर भी बहुत लगता है,पर ‘जो डर गया सो मर गया’, ऐसा कह कर हर चीज करने के लिए तैयार हो जाते हैं। बड़े होकर यहाँ जाएँगे,वहाँ घूमेंगे,ये खरीदेंगे-वो खरीदेंगे,पढ़-लिख कर नाम रोशन करेंगे,ऐसी ही कई सारी बातें सोच-सोच कर खुश होते रहते हैं। और किसी से दोस्ती करने की कला तो मानो उपर से ही सीखकर आते हैं। मन बिलकुल साफ होता है,इसलिए सिर्फ अपना ही नहीं-दूसरों का भी भला सोचते हैं। विद्यार्थी जीवन में ही जीतने का जज्बा और हारने पर आगे बढ़ते रहने का हौंसला सीखते हैं। किसी दिन पढ़ते-पढ़ते ही सो जाते,तो किसी दिन पढ़ने के चक्कर में सोना ही भूल जाते हैं,जो यह दर्शाता है कि जीवन में आराम भी करो,पर मौका मिलने पर तेजी से दौड़ो भी।
इस उम्र में हर नई चीज को जानने और समझने के लिए आँख और कान हमेशा खुले रखते हैं। एक व्यक्ति अपने जीवन को कैसा मोड़ देगा,और जिंदगी कैसे बिताएगा,ये उसके विद्यार्थी जीवन पर ही निर्भर होता है, क्योंकि विद्यार्थी जीवन में ही हम चुलबुले रहना,अपने अंदर इंसानियत जिंदा रखना, गैरों के प्रति अच्छी नीयत रखना,हारने पर भी मुस्कुराकर आगे बढ़ना,सतत प्रयास करते रहना,बड़े सपने देखना,पर छोटी चीजों में भी खुश रहना,रो कर मन हलका कर लेना और रोते-रोते ही हँस देना जैसी अनगिनत सीख इसी काल में सीखते हैं। और यही सब चीजें हमें नेक इनसान और सर्वश्रेठ सामाजिक नागरिक बनाती है,जो हमारी जिंदगी को मूल्यवान और खूबसूरत बनाने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। अत: विद्यार्थी जीवन सीखने के लिए होता है,तो दिल खोल के सीखो। अच्छा-बुरा,सबका अनुभव लो, क्योंकि सीखोगे नहीं तो जिंदगी के पन्नों में लिखोगे क्या ?…..
थोड़ी मासूमियत आँखों में भर लेने दो,
थोड़ी और मनमानी कर लेने दो…।
कल का चमकता तारा हूँ,
क्योंकि किताबों में वक्त बिता रहा हूँ॥

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