कुल पृष्ठ दर्शन : 199

You are currently viewing हर रिश्ते में नारी

हर रिश्ते में नारी

एस.के.कपूर ‘श्री हंस’
बरेली(उत्तरप्रदेश)
*********************************

माँ से ही सवेरा और माँ से ही होती रात है,
माँ की ममता,प्यार अनमोल सौगात है।
माँ पास में तो है खुशी दुनिया जहान की-
माँ का स्पर्श सुखद मानो प्रथम किरण प्रभात है॥

बेटियाँ ही तो हरदम माँ-बाप पर प्यार लुटाती हैं,
बेटियाँ एक नहीं,दो वंशों का उद्धार कराती हैं।
नारी जगत जननी है वो सृष्टि की रचनाकार-
प्रभु का बन कर प्रतिरूप,बेटी जग में आती है॥

हर रिश्ते के मूल आधार में बेटी होती है,
अपनों की खुशी के लिए,अपना सुख खोती है।
दो घरों में बराबर प्यार बाँटती है हर बेटी-
त्याग की मूरत बेटी,हर दु:ख में पहले रोती है॥

नसीब वालों के आँगन में सुंदर-सी बेटी दिखती है,
भाग्य वालों को ही जन्म में पुत्री मिलती है।
ईश्वर का अवतार और उपहार होती हैं बेटियाँ-
किस्मत वालों के आँगन में यह कली खिलती है॥

Leave a Reply