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हिन्दी ममतामयी

वंदना जैन
मुम्बई(महाराष्ट्र)
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हिंदी और हमारी ज़िंदगी…

पूर्वजों द्वारा प्रदत्त हमें हिंदी राष्ट्रभाषा उपहार मिला,
स्वर्णाक्षरों में यह अपना अनुपम इतिहास बतलाती है।

अंग्रेजी के छा जाने से कितनी पीड़ाएँ हैं इसने भोगी,
सहज, सौम्य बन मेल-मिलाप में उपयोगी बन जाती है।

संस्कृत ने देकर मातृत्व पाला है इसे बड़े नाजों से,
माथे पर बिंदी समान रिवाजों से अपना ताज सजाती है।

कवियों ने गढ़ कर कविताएं अद्भुत साहित्य बतलाया,
विश्व पटल पर गूँज कर हिंदी भारत का गर्व बढ़ाती है।

भाषा विष्णुप्रिया, शब्दवैभवी, भावों में यह इठलाती है,
लोकोक्तियों और मुहावरों से जीवन अर्थ समझाती है।

कटाक्षों द्वारा सामाजिक, राजनीतिक दर्पण दिखलाकर,
साहित्य के आवरण में लिपट चरित्र निर्माण करवाती है।

अनेकता में एकता की डोर लिए शिखर पर है आरूढ़,
अलंकारों से सुसज्जित इतिहास की सखी कहलाती है।

सामाजिक परिप्रेक्ष्य की अभिव्यक्ति का बनती है माध्यम,
मुखर हो राजनीतिक परिवेश का आईना भी बन जाती है।

माँ की मधुर लोरी समेटे प्राकृत है यह प्रगाढ़ प्रेम की,
गाँव, शहर, गली, नुक्कड़ों पर शान से खूब बतियाती है।

सुन्दर व्याकरण, बावन वर्ण, शब्दों से श्रृंगारिक हो कर,
शब्दों के अविरल निर्झर की जन-जन में धार बहाती है।

रैदास, कबीर, तुलसी, बिहारी, जयशंकर की रही दुलारी,
स्नेह और ममता की ‘गागर में सागर’ हिंदी कहलाती है॥

परिचय-वंदना जैन की जन्म तारीख ३० जून और जन्म स्थान अजमेर(राजस्थान)है। वर्तमान में जिला ठाणे (मुंबई,महाराष्ट्र)में स्थाई बसेरा है। हिंदी,अंग्रेजी,मराठी तथा राजस्थानी भाषा का भी ज्ञान रखने वाली वंदना जैन की शिक्षा द्वि एम.ए. (राजनीति विज्ञान और लोक प्रशासन)है। कार्यक्षेत्र में शिक्षक होकर सामाजिक गतिविधि बतौर सामाजिक मीडिया पर सक्रिय रहती हैं। इनकी लेखन विधा-कविता,गीत व लेख है। काव्य संग्रह ‘कलम वंदन’ प्रकाशित हुआ है तो कई पत्र-पत्रिकाओं में आपकी रचनाएं प्रकाशित होना जारी है। पुनीत साहित्य भास्कर सम्मान और पुनीत शब्द सुमन सम्मान से सम्मानित वंदना जैन ब्लॉग पर भी अपनी बात रखती हैं। इनकी उपलब्धि-संग्रह ‘कलम वंदन’ है तो लेखनी का उद्देश्य-साहित्य सेवा वआत्म संतुष्टि है। आपके पसंदीदा हिन्दी लेखक-कवि नागार्जुन व प्रेरणापुंज कुमार विश्वास हैं। इनकी विशेषज्ञता-श्रृंगार व सामाजिक विषय पर लेखन की है। जीवन लक्ष्य-साहित्य के क्षेत्र में उत्तम स्थान प्राप्त करना है। देश और हिंदी भाषा के प्रति विचार-‘मुझे अपने देश और हिंदी भाषा पर अत्यधिक गर्व है।’