कुल पृष्ठ दर्शन :

क्यों न आए श्याम…?

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
************************************

मैं हेरी-हेरी देखूँ,
अब तक क्यों न आए श्याम
तुम कहाँ रह गए मेरे,
सुन लो मेरी पुकार श्याम।

मैं तुम्हें पुकारूँ,
ले-लेकर तेरा नाम
हर पल रो-रोकर,
गला मेरा रुंध गया
रात भी अब ढल चली,
मन के दीपक जला-जला कर
तेरी राह निहारूँ,
मैं हेरी-हेरी देखूँ
अब तक क्यों न आए श्याम…?

कैसे तुझे ढूँढूं,
इस संसार की भीड़ में ?
तेरे बिना जीवन मेरा,
सूना और वीरान लगे
तू तो क्षण-भर की पुकार पर,
भक्तों की सुन लेता है
प्रेम भरे हर हृदय की,
मनोकामना पूरी करता है
जब-जब किसी ने,
संकट में तुझे पुकारा
तब-तब दौड़े आए तुम,
सबके दुःख हर ले जाते।
फिर क्यों न आए श्याम…?

मैं हेरी-हेरी देखूँ,
तुम तो आते
करुण पुकार सुनकर,
निर्मल, उज्ज्वल
तेरा सुंदर मन,
दया और प्रेम से भरा
मैं कहाँ से लाऊँ
निर्मल ऐसा मन ?
झिल-मिल उजियारा भर दो,
मेरे सूने जीवन में
मैं हेरी-हेरी देखूँ,
तुम रह गए कहाँ…
अब तक क्यों न आए श्याम…?

दीन-दुखियों की भी,
करुण पुकार सुनते हो
मैं भी हूँ एक दीन-दुखी,
सुन लो मेरी भी पुकार
मैं हेरी-हेरी देखूँ,
अब तक क्यों न आए श्याम…?

मैं तो हूँ एक पतित,
अपना समझकर
मुझे गले लगा लो,
अपने चरणों में स्थान देकर
जीवन मेरा सफल बना दो
मैं हेरी-हेरी देखूँ,
अब तक क्यों न आए श्याम…?

आओ मेरे श्याम,
अब और न तड़पाओ
तुम बिन सूना जीवन मेरा,
आकर इसे सफल बनाओ
तेरे दर्शन की अभिलाषा में,
हर पल आँखें राह निहारें
करुणामय! अब कृपा करो,
अपने भक्त को गले लगा लो।
मैं हेरी-हेरी देखूँ,
अब तक क्यों न आए श्याम…?