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तुलसी के साहित्य को केवल पढ़ने की नहीं, जीने की जरूरत

आगरा (उप्र)।

तुलसीदास जी अपनी जीवन यात्रा में जो कुछ देखा, उसे आत्मसात कर सिद्ध किया और गद्य को अमृत बनाकर जनमानस के कल्याण के लिए समर्पित कर दिया। आज जरूरत तुलसी के साहित्य को केवल पढ़ने की नहीं, अपितु तो उसे जीने की है। 
   नागरी प्रचारिणी सभा, आगरा में तुलसी जयंती के अवसर पर आयोजित साहित्यिक चर्चा में यह बात केंद्रीय हिंदी संस्थान की पूर्व निदेशक प्रो. वीना शर्मा ने मुख्य अतिथि के नाते कही। अध्यक्षता सभा के सभापति डॉ. खुशीराम शर्मा ने की। प्रख्यात साहित्यकार डॉ. शशि तिवारी की सरस्वती वंदना से कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। सभा की उपसभापति डॉ. कमलेश नागर ने संचालन के दौरान तुलसी साहित्य की सहजता, विशदता और भाव-प्रवणता को रोचक ढंग से प्रस्तुत किया। कार्यक्रम में नगर के अनेक साहित्यकारों ने तुलसीदास जी के जीवन-संघर्ष तथा उनके कृतित्व और व्यक्तित्व पर विचार प्रस्तुत किए।
कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. खुशीराम शर्मा ने कहा कि साहित्यकारों का दायित्व है कि इस साहित्य को जन-जन तक पहुँचाने में सतत प्रयास रहे।
इस अवसर पर डॉ. मधु भारद्वाज, राजीव सक्सेना, डॉ. मधुरिमा शर्मा आदि रचनाकारों ने भी विचार प्रस्तुत किए।
   धन्यवाद ज्ञापन पूर्व प्राचार्य डॉ. विनोद माहेश्वरी ने दिया।