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निराकरण तो करना है

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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‘नीट’ विवाद-आंदोलन…

देशभर में सड़कों पर छात्र कर रहे अपने अधिकारों की बात,
ऐसे में चुप नहीं बैठ सकते हो सरकार
आप उनके ‘भविष्य’ के हो तारणहार,
उनकी परेशानी का आपको करना है निराकरण…।

कुछ गलती अगर हुई है, तो उसे ठीक किया जा सकता है,
सुधार हेतु ‘प्रयास’ जरूरी है, प्रबंधन के प्रबंध को चुस्त-दुरुस्त किया जा सकता है
फिर भी इतने समय से मौन रहने का क्या ‘फायदा’ हुआ,
सरकार समस्या का निराकरण तो करना है…।

समाधान-शंका के निवारण ‘विश्वास’ के लिए अब तो आगे आ जाइए,
शिक्षा के मंदिर को ‘राजनीति’ का अखाड़ा नहीं बनाइए
क्योंकि यह ‘चिंगारी’ आग की तरह फैलेगी, तो सब-कुछ खत्म कर देगी,
इसलिए आप सरकार खुला दिल रखकर आगे हाथ बढ़ाइए।

विधार्थियों की ‘समस्याओं का निराकरण तो आपको ही करना है,
छात्रों के ‘आन्दोलन’ में इतने लोग अपनी राजनीतिक चालें चल रहे हैं
उन शह और मात के ‘मौकापरस्ती’ लोगों को ज़बाब तो देना है,
छात्र-छात्राओं के भविष्य और हर एक परीक्षा को ” पारदर्शी” बनने की पहल आप को करना है,
क्योंकि आप ‘सत्ताधारी’ हो, इसलिए समस्या का निराकरण करना है…॥