सरोज प्रजापति ‘सरोज’
मंडी (हिमाचल प्रदेश)
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भीतर का रावण (विजयादशमी विशेष)….
घृणित व्याल ‘दुष’ दुराचारी,
चित्तधूर्त, चपल, व्यवहारी
भीतरी रावण है अनाचारी,
ओढ़ व्यग्रता, नाहक लाचारी।
काम-क्रोध, लोभ-मोह के घेरे,
भीतर स्थित, अंध मस्ती घेरे
रक्तबीज, सम बढ़ते घेरे,
अगणित दैत्य विवेक घेरे।
चाह अकारण दनुज होए,
दश;आनन अविवेकी होए
बुराई दहन प्रतिवर्ष होए,
दुर्गम राक्षस भस्म न होए।
दशहरा उत्सव उत्साह जगाए,
उन्माद जुगुप्सा हर्ष जगाए
भूमीश, नीच कर्म, दोष पाए,
भक्त शिवप्रिय अहम् पाए।
नारी प्रति तिरस्कृत भाव,
सामर्थ्य वान कुपथ चाल
शक्ति सम्पन्न नहीं मंगल भाव,
वंदनीय नही, निंदनीय चाल।
अरे! हर वर्ष जलाते बुराई,
मन मैला क्या ? जलाये बुराई।
अंतःकरण निशदिन लड़ाई,
हठीला मन निःशब्द बुराई।॥
परिचय-सरोज कुमारी लेखन संसार में सरोज प्रजापति ‘सरोज’ नाम से जानी जाती हैं। २० सितम्बर (१९८०) को हिमाचल प्रदेश में जन्मीं और वर्तमान में स्थाई निवास जिला मण्डी (हिमाचल प्रदेश) है। इनको हिन्दी भाषा का ज्ञान है। लेखन विधा-पद्य-गद्य है। परास्नातक तक शिक्षित व नौकरी करती हैं। ‘सरोज’ के पसंदीदा हिन्दी लेखक- मैथिली शरण गुप्त, सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ और महादेवी वर्मा हैं। जीवन लक्ष्य-लेखन ही है।