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मिट्टी का दीपक

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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मिट्टी का एक दीपक
जलाओ कहीं,
है अँधेरा बहुत
जगमगाओ कहीं।

घर किसी के दिवाली
मनाओ कभी,
साथ उनके रंगोली
बनाओ कभी।

आसरा है कि कुछ माल
उनका बिके,
जाकर उनसे घर
दीपक जलाओ कभी।

जो सड़क के किनारे
बसेरा करें,
उनके संग तुम पटाखे
चलाओ कभी।

दीप का पर्व सबके,
घर दीपक जले।
हो उदासी जहाँ,
तुम लगा लो गले॥