डॉ.विद्यासागर कापड़ी ‘सागर’
पिथौरागढ़(उत्तराखण्ड)
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झाड़ो, झटको, पोंछो,
घर-आँगन अरु द्वार।
लक्ष्मी माँ आएगी,
सुख देने संसार॥
स्वच्छ गेह जब हो तो,
माँ आती है दौड़।
ठुमुक-ठुमुक आती है,
अपना मंदिर छोड़॥
लाल चुनरिया चढ़ती,
नव फूलों का हार।
झाड़ो, झटको, पोंछो,
घर-आँगन अरु द्वार…॥
शीत भरे मुस्कानें,
आता कार्तिक मास।
निशा अमावस की हो,
पूजन कर लो खास॥
केवट बनती माता,
देती तरणी तार।
झाड़ो, झटको, पोंछो,
घर-आँगन अरु द्वार…॥
दीप जलाओ कर दो,
माता का श्रिंगार।
पूजन से होता है,
जीवन का उद्धार॥
भक्तों की टोली है,
माता का परिवार।
झाड़ो, झटको, पोंछो,
घर-आँगन अरु द्वार…॥
रमा मुदित हो जाये,
करती मालामाल।
सारी बाधाओं को,
माता देती टाल॥
रीझ गई माता तो,
कभी न मिलती हार।
झाड़ो, झटको, पोंछो,
घर-आँगन अरु द्वार…॥
ममता की सागर माँ,
करुणा की है खान।
वैभव का भक्तों को,
देती माँ ही दान॥
जगती पर माँ के हैं,
कोटि-कोटि उपकार।
झाड़ो, झटको, पोंछो,
घर-आँगन अरु द्वार…॥
लक्ष्मी माँ आएगी,
सुख देने संसार।
झाड़ो, झटको, पोंछो,
घर-आँगन अरु द्वार…॥