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अनुपम स्नेह और आत्मीयता का मिलन पर्व था वियतनाम अधिवेशन

सरोजिनी चौधरी
जबलपुर (मध्यप्रदेश)
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यात्रा वृत्तांत…

यात्रा चाहे जीवन की हो या किसी स्थान की, अनन्य और अप्रतिम होती है। मानव एक जिज्ञासु प्राणी है और नए-नए स्थान को देखना, उसके सौंदर्य को परखना व्यक्ति को अनुपम सुख प्रदान करता है।
जहाँ तक मेरा प्रश्न है, मैं एक पैर से निरन्तर यात्रा के लिए तैयार रहती हूँ चाहे वह देश के अन्दर की हो या बाहर की। अभी हाल ही में मुझे वियतनाम जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। वियतनाम के विषय में सुना ज़रूर था, पर जाना नहीं हुआ था।
मैं कई साहित्यिक संस्थाओं से जुड़ी हूँ।
हमारी यह यात्रा भी एक साहित्यिक संस्था के साथ हुई, जिसके संस्थापक पं. सुरेश नीरव हैं। संस्था का नाम है अखिल भारतीय सर्वभाषा संस्कृति समन्वय समिति। संस्था का चौबीसवाँ अधिवेशन वियतनाम के हो जी मिन्ह में होना निश्चित हुआ।
यात्रा १९ जून से २३ जून तक थी। शीघ्र ही प्रतीक्षा समाप्त हुई और यात्रा का दिन आ गया। आवश्यक वस्तुओं की सूची पहले ही प्राप्त हो चुकी थी। हमारी फ्लाइट का समय १.१० बजे दिन में था। लगभग १०-११ बजे के बीच सब लोग एयरपोर्ट पर पहुँच गए थे। अगले दिन अर्थात् २० जून को हमारा साहित्यिक कार्यक्रम होटल के सभागार में ही होने वाला था। रात होटल पहुँच कर सबने अपने-अपने कमरे में आराम किया और अगले दिन लंच के बाद कार्यक्रम के लिए तैयार होकर सब सभागार में पहुँच गए।
  सभागार बड़े ही कलात्मक ढंग से सजाया गया था, जहाँ अध्यक्ष के रूप में पंडित सुरेश ‘नीरव’ विराजमान हुए, भारतीय सेना के सेवानिवृत्त मेजर जनरल अनूप कुमार ने महोत्सव का उद्घाटन किया, संचालक के रूप में राखी कटियार ने अपना स्थान ग्रहण किया। इस बार अधिवेशन का विषय ‘विश्व बन्धुत्व एवं पर्यावरण’ था। छत्तीसगढ़ से आयी कत्थक नृत्यांगना डॉ. अनुराधा दुबे ने कत्थक नृत्य शैली में गणेश वंदना प्रस्तुत की। मेजर जनरल की अर्द्धांगिनी श्रीमती मीरा नायर ने ‘नीरव’ द्वारा वियतनाम पर लिखी गई रचना को स्वर दिया, स्वर इतना मधुर था कि ऐसा लग रहा था कि सभागार में बैठे सभी लोगों पर किसी ने जादू कर दिया हो। पहले सभी सहभागियों को आदर और सम्मान के साथ अलंकृत किया गया। समारोह की पूर्णता उस समय दिखाई दी, जब पं. ‘नीरव’ को प्रतिष्ठित ‘हो ची मिन्ह’ सम्मान एवं साहित्य एवं साहित्य साधक मंच के सर्वोच्च सम्मान ‘सृजन तीर्थ’
सम्मान से अलंकृत किया गया। डॉ. प्रकाश उपाध्याय के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर केन्द्रित प्रज्ञान विश्वम् के अंक का विमोचन किया गया।
दूसरे सत्र में सभी साहित्यकारों ने अपनी भावना को अपनी रचनाओं के माध्यम से व्यक्त किया। ‘नीरव’ ने वियतनाम पर संस्कृत में लिखे हुए अपने गीत से सबको मोहित किया।समिति का यह अधिवेशन अनुपम स्नेह और आत्मीयता का मिलन पर्व था, जिसकी मिठास दीर्घ काल तक लोगों के दिलो-दिमाग़ पर रची-बसी रहेंगी। संध्या ६ बजे तक यह कार्यक्रम समाप्त हुआ, उसके बाद सब भोजन के लिए रेस्टोरेंट गए, जहाँ पहले से हम लोगों की बुकिंग की गई थी। वहाँ ‘नीरव’ का ७७वाँ जन्मदिन हर्षोल्लास के साथ मनाया गया।
अगले दिन प्रातः काल जलपान के बाद हमें ‘क्यू ची टनल’ के लिए रवाना होना था, जहाँ धरती के नीचे बनी विशाल सुरंगों का नेटवर्क है।
बुजुर्गों को टनल के अंदर जाने की सलाह नहीं दी जाती, क्योंकि वहाँ आक्सीजन की कमी हो जाती है, यह बात हमारे गाइड ने हमें पहले ही बता दी थी। अदम्य साहस, अपूर्व बलिदान की गाथा लिखने वाला वियतनाम युद्ध के समय इन टनलस् का प्रयोग करता था। दिन के खाने के बाद हम सब ‘मेकांग डेल्टा’ पहुँचे, जहाँ से क्रूज़ द्वारा
‘यूनिकॉर्न आइलैंड’ स्थानीय शहद के खेत और नारियल कैंडी कार्यशाला का अवलोकन किया ।
वहाँ स्थानीय लोगों द्वारा स्वागत गीत गाया गया तथा ताज़ा फल खाने के लिए दिए गए। हाथ से बनी हुई वस्तुओं की छोटी-छोटी दुकानें भी थीं, जहाँ से लोग सामान ख़रीद सकते थे। वहाँ हमने नारियल के जूट से लेकर नारियल से बने टॉफ़ी, मिठाई तथा अन्य सामग्री भी देखे, कई लोगों ने शॉपिंग भी की। लौटते समय हम सबको छोटी नाव से जाना था, जिसमें केवल ३ लोग एक साथ बैठ सकते थे। इस नाव में बैठने का अलग ही आनंद था।
नाव को चलाने वाली सब महिलाएँ थीं, पतली-सी नहर में से हम सबकी नाव जंगलों के बीच से गुज़र रही थी। थोड़ी देर में हम वहाँ पहुँच गए, जहाँ से हमें बस में बैठना था।रेस्टोरेंट में खाना खाने के बाद सबने अपने-अपने कमरे में विश्राम किया।
     अगले दिन प्रातः नाश्ते के बाद एक बार फिर हम सब तैयार थे। आज हमें सिटी टूर के लिए निकलना था। यह शहर अपनी तेज़ रफ़्तार ज़िंदगी, ऐतिहासिक धरोहरों और आधुनिक विकास के लिए जाना जाता है। यहाँ की सड़कों पर हज़ारों मोटरसाइकिलें दौड़ती नज़र आती हैं, और हर ओर लोगों की चहल-पहल होती है। आज सबसे पहले हम सब आर्ट गैलरी गए, जहाँ पर बाँस से बनी हुई विभिन्न सामग्री, कपड़े तथा मोती आदि के बने विभिन्न तरह के आभूषण भी देखने को मिले।
इसके बाद चाइना टाउन गए, जहाँ चायनीज मंदिर (थियन हौ मंदिर) देखा, जो तरह-तरह की मोमबत्तियों तथा अगरबत्तियों से सजाया गया था। इसके बाद हम ‘वार रेमनेन्ट्स’ म्यूजियम पहुँचे। यह म्यूजियम वियतनाम युद्ध के दौरान हुए विनाश और वियतनामी लोगों के संघर्ष को दर्शाता है।
  वियतनाम जाएँ, तो सैगाँन नदी कैसे न जाएँ, वहाँ बोटिंग की, नदी के किनारे खड़ी मॉर्डन इमारतें, पुल और हरियाली एकसाथ देखकर समझ में आया, कि शहर अपनी विरासत और आधुनिकता को साथ लेकर आगे बढ़ रहा है। इसके बाद हम सब हो ची मिन्ह शहर के केन्द्र में स्थित महान क्रांतिकारी नेता और वियतनाम के राष्ट्रपिता ‘हो ची मिन्ह’ को समर्पित स्मारक देखने गए, जो कांस्य का बना हुआ है। सन् १९७५ से पहले हो ची मिन्ह शहर का नाम साइगॉन था। १९७५ में उत्तरी वियतनामी सेना ने क़ब्ज़ा कर लिया और शहर का नाम ‘हो ची मिन्ह’ कर दिया गया। सबने फ़ोटो वगैरह ली और हम रियूनिफिकेशन पैलेस देखने चले गए। यह महल वियतनाम के राष्ट्रपति का अधिकारिक निवास और कार्यस्थल हुआ करता था, इसकी वास्तुकला में आधुनिक पश्चिमी डिज़ाइनों के साथ-साथ पारंपरिक वियतनामी और चीनी वास्तुशिल्प का बहुत सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है।    
            बहुत बड़े आकार में फैला कान्फ्रेंस रूम, ड्राइंग और डाइनिंग रूम आज भी उसी तरह संरक्षित और सुसज्जित है। इसके बाद हम सब गस्टवें आईफेल द्वारा डिज़ाइन किया गया साइगॉन पोस्ट ऑफिस देखने गए। यह शहर के फ़्रेंच और वियतनामी वास्तुकला शैलियों के मिश्रण की याद दिलाता है। सब बहुत थक चुके थे, रेस्टोरेंट जाकर सबने भोजन किया और वापस अपने होटल में आ गए।
  अगला दिन हमारी यात्रा का अंतिम दिन था। हम लोगों को १२ बजे होटल छोड़ना था और हमारी फ्लाइट रात को थी। सब कुछ पहले से तय था, सब सामान बस में रखा गया। १२ बजे हम सबने होटल छोड़ दिया और शॉपिंग के लिए हमको मार्केट में छोड़ दिया गया। एक स्थान निश्चित हुआ कि यहाँ सब समय पर मिलेंगे।
   यहाँ के बाज़ार भी काफ़ी दिलचस्प हैं। पारंपरिक हस्तशिल्प कपड़े, सजावटी सामान, कॉफ़ी, मसाले आदि से लेकर सभी तरह के सामान मिल जाते हैं, मोल-भाव भी बहुत करना पड़ता है। सबने कुछ न कुछ ख़रीदा और समय पर निश्चित स्थान पर पहुँच गए।
    मैं शाकाहारी हूँ, इसलिए खाने को लेकर थोड़ी चिंता थी, पर वहाँ इन्डियन रेस्टोरेंट में भारतीय मिले जिन्होंने स्वादिष्ट इंडियन फ़ूड से हम सबका स्वागत किया। यह यात्रा बहुत आरामदायक रही।