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हिंदी के संरक्षण और संवर्धन की जिम्मेदारी सबकी

इंदौर (मप्र) |

हिंदी केवल एक भाषा नहीं, अपितु भारतीय जनमानस की आत्मा है। हिंदी विश्व की एकमात्र ऐसी वैज्ञानिक भाषा है, जिसमें जो बोला जाता है, वही लिखा जाता है। हिंदी के संरक्षण और संवर्धन की सामूहिक जिम्मेदारी सबकी है।
यह विचार अध्यक्षीय उद्बोधन में देवी अहिल्या विवि के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई ने व्यक्त किए। विवि में ‘हिंदी दिवस’ के अवसर पर देवज्ञ क्लब और तुलनात्मक संस्कृति एवं भाषा अध्ययनशाला के संयुक्त तत्वावधान में यह विशेष साहित्यिक कार्यक्रम किया गया। आयोजन मालवीय मिशन टीचर्स ट्रेनिंग सेंटर सभागृह (तक्षशिला परिसर) में सुबह हुआ, जिसमें विवि के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने अपनी स्वरचित भजन, कविताओं, ग़ज़लों और आलोचनात्मक लेख का वाचन किया। प्रत्येक प्रस्तुति में हिंदी भाषा की विविधता, अभिव्यक्ति की शक्ति और समृद्ध सांस्कृतिक धारा का सुंदर चित्रण किया गया। कार्यक्रम में कुलगुरु द्वारा व्यंग्य विद्या में लिखित पुस्तक ‘वक्रोक्ति’ का आशु आलोचना लेखन और वाचन गौरव गौतम (शोधार्थी) ने किया। अन्य शिक्षकों ने भी अपनी-अपनी रचनाओं का वाचन भी किया।
कार्यक्रम का संचालन प्रो. डॉ. जयश्री बंसल ने किया।