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साहित्यिक पत्रिका समागम संग हुआ सम्मान समारोह

गुना (मप्र)।

सामाजिक साहित्यिक आध्यात्मिक संस्था दृष्टि गुना द्वारा हिंदी पत्रकारिता के द्विशताब्दी वर्ष के उपलक्ष्य में साहित्यिक पत्रिका समागम एवं सम्मान समारोह का आयोजन स्थानीय निजी होटल में किया गया। साहित्य अकादमी मप्र के निदेशक डॉ. विकास दवे का मुख्य आतिथ्य तथा वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. रामसनेही लाल शर्मा ‘यायावर’ की अध्यक्षता में यह हुआ।
   कार्यक्रम के मुख्य वक्ता खंडवा से ललित निबंधकार डॉ. श्रीराम परिहार रहे। शुभारंभ मंचासीन अतिथियों द्वारा माँ सरस्वती के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन एवं माल्यार्पण के साथ हुआ। नीलम कुलश्रेष्ठ द्वारा सरस्वती वंदना प्रस्तुत की गई। दृष्टि के अध्यक्ष अनिरुद्ध सिंह सेंगर ने संस्था का परिचय देते हुए स्वागत उद्बोधन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर हिंदी पत्रकारिता के द्विशताब्दी वर्ष पर प्रकाशित स्मारिका ‘वैभव’ सहित मधुर कुलश्रेष्ठ के उपन्यास ‘अदृश्य’ तथा संतोष परिहार की कृति ‘जो हो न सका’ का लोकार्पण भी अतिथियों ने किया। अध्यक्षीय उद्बोधन में ‘यायावर’ ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता ने भारतीय समाज को जागृत करने और साहित्यिक चेतना को जन–जन तक पहुंचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई है। साहित्यिक पत्रिकाएं आज भी वैचारिक संवाद और सृजनशीलता की महत्वपूर्ण वाहक हैं।
  मुख्य अतिथि डॉ. दवे ने कहा कि हिंदी पत्रकारिता के दो सौ वर्ष केवल इतिहास नहीं, बल्कि भारतीय चिंतन, संस्कृति और समाज के विकास की गौरवगाथा हैं। आज आवश्यकता है कि युवा पीढ़ी पत्रकारिता के मूल्यों और सामाजिक सरोकारों को समझे तथा साहित्य और पत्रकारिता के बीच मजबूत सेतु का निर्माण करे।
डॉ. परिहार ने कहा कि साहित्यिक पत्रिकाएं साहित्य की  हैं।
     कार्यक्रम में साहित्यकार डॉ. जवाहर लाल द्विवेदी, डॉ. सतीश चतुर्वेदी ‘शाकुन्तल’, डॉ. शोभा सिंह, श्रीमती नीलम कुलश्रेष्ठ व डॉ. योग्यता भार्गव आदि उपस्थित रहे।