ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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कृष्ण प्रेम में तल्लीन मीरा,
दीन-दुनिया भुला बैठी मीरा
घर-बार उसने छोड़ दिया था,
मीरा ने विषपान किया था।
तुलसीदास ने भी गृह त्यागा,
पत्नी रत्नावली के प्रेम में
खिड़की से अजगर लटक रहा था
रस्सी समझ ऊपर आ गए कमरे में,
तब जाकर पत्नी ने फटकार लगाई।
घनानंद की आँखों में बस गई सुजान,
उसकी पूरी दुनिया बन गई सुजान
उसके प्रेम में कई रचनाएं कर डाली,
ब्रज में आकर कृष्ण राधा सेवाएँ की
उनके दिल से निकल न पायी सुजान।
राधा-कृष्ण का प्रेम अमर है,
कृष्ण के नाम जीवन बिताया
बांसुरी की धुन पर नृत्य रचाया
कृष्ण के दु:ख में साथ निभाया।
सावित्री और सत्यवान की बातें,
यमराज के पीछे सावित्री भागी
सास-ससुर की आँखें लौटाई।
उनका खोया अब राज्य लौटाया,
सत्यवान संग वो जीवन बिताई॥