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बारिश केवल बूँदें नहीं

संजय एम. वासनिक
मुम्बई (महाराष्ट्र)
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बारिश केवल बूँदें नहीं,
जो आसमान से धरती पर 
टपकती है एक-एक करके,
भिगो देती है धरती का आँचल
देती है नवजीवन…। 

बारिश, 
कभी यादों की होती है
कभी भावनाओं-सी होती है 
और कभी कभी,
मन को प्रसन्न कर 
शांति प्रदान करने वाला एक,
एहसास होती है…। 

बारिश की,
कुछ बूँदें भिगोकर जाती है 
तन को, मन को और 
कुछ बुंदे यादें दिलाती है,
कुछ बूँदें कुछ 
सिखाकर जाती है 
ज़िंदगी जीने का पाठ।
हँसते और मुस्कुराने का,
बारिश कुछ एैसी होती है…॥