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समय चक्र 

दीप्ति खरे
मंडला (मध्यप्रदेश)
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समय बड़ा अनमोल,
जाकर वापस न आए
समय चक्र में जीवन के,
हर एक रंग है समाए।

सुख-दुःख, आशा और निराशा,
मिलन-वियोग, कष्ट और आराम
समय चक्र के तार हैं ये सब,
जीवन इनमें फंस बढ़ता जाए।

जीवन पथ पर चक्र समय का,
हर पल बढ़ता जाए
ज्यों-ज्यों बढ़ता आगे जीवन,
यह नए रंग दिखलाए।

समय कभी अपना-सा लागे,
कभी अजनबी बन जाए
कभी बिठाए अर्श पर,
कभी फर्श पर ले आए।

अच्छा हों या बुरा समय हो,
रहता नहीं सदा के लिए
समय की बात यही खास है,
यह नित आगे बढ़ता जाए। 

कदम मिलाकर जीवन जीते जो,
समय चक्र के साथ। 
आसां उनका जीवन पथ होता,
वही जगत में अपनी पहचान बनाएं॥