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नंदलाला आ जाओ…

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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जन्माष्टमी विशेष…

कब तक हम भक्तों का,
इम्तिहान’ लोगे भगवान
अब तो आ जाओ, ‘पुकार’ रहा इंसान
हजारों तालों को तोड़ कर ‘नंदलाला’ आ जाओ।

हर जगह लूट मची है, कोई ‘सुनता’ नहीं है,
बेमानी व भ्रष्ट लोगों के ‘शोर’ में तुम भी अपना जलवा दिखाओ
इस छल-कपट, चोरी में दुनिया फंसी हुई है,
फिर क्यों नहीं आते, मेरे ‘नंदलाला’ आ जाओ।

कहीं आसमानी आफ़त, तो कहीं सूखी धरती माँ,
अमृत बूंदों का यह कैसा ‘विकराल’ स्वरूप दिख रहा है
पाप व पापी इतने बढ़ गए हैं तारणहार,
फिर ‘तुम’ क्यों नहीं आते, मेरे ‘नंदलाला’ आ जाओ।

आज नफ़रत ‘बांटते’ हैं, बेईमानों के सौदागर,
इनसे अपना ‘हिसाब’ चुका जाओ।
कब से ‘पुकार’ रहे, भक्त कृष्ण- कन्हैया,
अब फिर इस ‘धरती’ पर नंदलाला आ जाओ…॥