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जीवन को सँवारते अध्यापक

ममता सिंह
धनबाद (झारखंड)
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मेरे भाग्य विधाता… (शिक्षक दिवस विशेष)….

अज्ञान-तिमिर दूर, भगाते अध्यापक,
हमारे जीवन को संवारते अध्यापक।

शिष्य के लिए होते हैं वो सहायक,
उसके जीवन को, संवारे अध्यापक।

क्या करना है, और कैसे करना है,
शिष्य को समझाते हैं अध्यापक।

राह में जब कभी भी, बाधा आ जाए,
अपनी बुद्धि से हल करते अध्यापक।

सुन्दर-सुन्दर सपने, दिखाते अध्यापक,
शिक्षार्थी को लक्ष्य बताते अध्यापक।

वो न होते तो हम, सभी लोग मूढ़ होते,
जीवन का गूढ़ रहस्य बताते अध्यापक।

‘क’ से लेकर ‘ज्ञ’ तक, ‘ए’ से लेकर ‘जेड’ तक,
शिष्य एकलव्य तो, द्रोणाचार्य है अध्यापक।

दूर से लेकर पास तक, ज्ञात से अज्ञात तक,
धरती से आकाश तक, शून्य से शिखर तक।

सूक्ष्म से विशाल तक, जीवन से मृत्यु तक,
दिन से रात तक, कल से लेकर आज तक।

भूत से भविष्य तक, इतिहास से भूगोल तक,
जीव से निर्जीव तक, हिन्दी से संस्कृत तक।

सूर्य से चाँद तक, हिमालय से गंगा तक,
नमक से शहद तक, गीत से संगीत तक।

‘ग’ से गुरु की महिमा, होती आध्यात्मिक,
हमारी जिज्ञासा, शांत करते अध्यापक।

पांच सितम्बर को मनाते शिक्षक दिवस,
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन जन्म दिवस॥