प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’
सहारनपुर (उप्र)
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जन्माष्टमी विशेष…
भादौ अष्टमी रात्रि में हुआ श्री कृष्ण अवतार,
सो गए पहरेदार, सब खुल गये बंदीगृह द्वार।
रोई देवकी, तड़प कर हुए वासुदेव तैयार,
सूप में रख श्रीकृष्ण को चले गोकुल यमुना पार।
बाबा नंद घर रख चले नवजात पुत्र मन मार,
नंद जसोदा बड़भागी हरि आए उनके द्वार।
जसोदा घर आए हरि बाल रूप,
त्रिलोक मगन भये शोभा अनूप।
नंद बाबा के द्वारे गाएं सब बधाई,
नज़रें उतारें लाला की जसो धूप,
सांवरी सूरतिया लुभावना है रूप।
किलकि हँसे हरि त्रिभुवन डोले,
महिमा कैसे कोई मुख से बोले।
संग जसोदा हरि अंगना में धाए,
पैंजन रुन – झुन मन अति भाए।
कंस ने दैत्य हरि मारन भेजे,
माई बन गोद कान्हा पूतना सहेजे।
मोहित निहारे उन्हें रंक हो या भूप,
वाको पहुंचाओ हरि काल को कूप।
मन भाए कान्हा दूध, दही, माखन, मिसरी,
मीठे – मीठे बोल बोलें सुध-बुध बिसरी।
मन मोहें सबका सभी के अनुरूप,
जसोदा घर आए हरि बाल रूप॥