प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’
सहारनपुर (उप्र)
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पधारिए ना विघ्नहर्ता… (गणेश चतुर्थी विशेष)…
लंबोदर गज बदन विनायक महिमा अपरंपार,
बुद्धि, विवेक में अग्रणी प्रथम पूज्य करतार।
करें महिमा श्रवण गणपति जी की,
सब नमन करें, सब नमन करें
हैं भक्त शरण गणपति जी की,
सब नमन करें, सब नमन करें…।
संसार परिक्रमा करनी थी,
वे मात-पिता की कर आए
बुद्धि है परम गणपति जी की,
सब नमन करें, सब नमन करे…।
भक्तों की विपत्ति हर लेते,
कष्टों को दूर कर देते हैं।
शोभा चंद्रमुकुट गणपति जी की,
सब नमन करें, सब नमन करें…।
सुर-असुर सभी करते वंदन,
भक्तों का आश्रय श्री गणेश
रिद्धि-सिद्धि पत्नी गणपति जी की,
सब नमन करें, सब नमन करें…।
हैं ओजस्वी बुद्धि दाता,
लंबोदर सब शुभ वर दाता
है मूषक सवारी गणपति जी की,
सब नमन करें, सब नमन करें…।
विद्या, विवेक की ज्योति से,
अज्ञान मिटा दो गणपति जी
भक्ति में मगन गणपति जी की,
सब नमन करें, सब नमन करें…।
हैं प्रसन्न मुख मुक्ति-दाता,
और हाथ में मोदक लिए हुए
दुराचारी कुदृष्टि गणपति जी की,
सब नमन करें, सब नमन करें…।
करें महिमा श्रवण गणपति जी की,
सब नमन करें, सब नमन करें।
हैं भक्त शरण गणपति जी की,
सब नमन करें, सब नमन करें…॥