हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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भीतर का रावण (विजयादशमी विशेष)…
अवगुणों को मत बढ़ने दो,
अपने आप को परखो
चिंतन तो करो अपने व्यक्तित्व का,
या फिर भीतर के रावण को जलाओ।
बहुत जला चुके तुम रावण को,
फिर भी तुम्हारे अंदर का पापी जिंदा है
उस नकारात्मकता को खत्म करो,
पहले अपने भीतर के रावण को जलाओ।
आज भी दस सिरों वाला महा-अभिमानी यूँ ही खड़ा है,
उसके अहंकारी स्वरूप को मिटा दो
इन राक्षस, दानव, पापियों के खिलाफ एकजुट होकर आगे बढ़ो,
लेकिन पहले अपने अंदर के रावण को जलाओ।
काम, क्रोध, माया, लोभ के साथ,
भ्रष्टाचार पर लगाम लगाओ।
नारी शक्ति का मान-सम्मान करना सीखो और सिखाओ,
पहले अपने अंदर के रावण को जलाओ…॥