पद्मा अग्रवाल
बैंगलोर (कर्नाटक)
******************************
माँ की कृपा के रंग (नवरात्रि विशेष)…
नवरात्र में देवी के नौ रूपों नवदुर्गा की पूजा आराधना की जाती है
शैलपुत्री – पर्वतराज हिमालय की पुत्री
ब्रह्मचारिणी – तपस्या और ब्रह्मचर्य धारण करने वाली
चंद्रघंटा – जिनके मस्तक पर घंटे के आकार का अर्धचंद्र है।
कूष्मांडा – अपनी मुस्कान से ब्रम्हांड की रचना करने वाली
स्कंदमाता –भगवान् कार्तिकेय स्कंद की माता
कात्यायिनी – महर्षि कात्यायन की तपस्या से प्रकट होने वाली
कालरात्रि – अंधकार और नकारात्मक शक्तियों का नाश करने वाली
महागौरी – शांति , पवित्रता और सौम्यता का प्रतीक
सिद्धिदात्री – सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करने वाली।
नवरात्रि का पर्व शक्ति की स्थापना का पर्व, जब हम सभी अपनी आध्यात्मिकता के साथ अपने शारीरिक स्वास्थ्य एवं अपनी मानसिक स्थिति पर ध्यान केंद्रित कर सकते हैं। यह समय न केवल देवी की उपासना करने का है, वरन् स्वयं को निखारने और अपनी जीवन-शैली को बेहतर बनाने का भी है। नवरात्रि के इन ९ दिनों में हम सकारात्मकता को अपने जीवन में शामिल करने के लिए ठोस कदम उठा सकते हैं। इससे न केवल अपने जीवन में संतुलन ला सकते हैं, वरन् अपने आस-पास रहने वालों को भी प्रेरणा दे सकते हैं ।
सकारात्मक सोच– हर सुबह कुछ सकारात्मक विचारों को दोहराएं। यह आपके जीवन को सकारात्मक दिशा में ले जाएगा। ध्यान करने से मन को असीम शांति मिलती है, और नकारात्मक विचार कम हो जाते हैं। तो क्यों न हम लोग इसकी शुरुआत नवरात्रि के शुभ दिन से ही करें। नवरात्रि के दौरान नियमित रूप से ध्यान करने का प्रयास करें। माँ दुर्गा की उपासना करके भी आप आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस कर सकते हैं, जिससे जीवन में सकारात्मकता आती है।
आत्म चिंतन करें – आत्मचिंतन महत्वपूर्ण प्रक्रिया है, जो हमें अपने मन की विचारों, भावनाओं और कार्यों पर ध्यान देनें का अवसर देती है। यह न केवल हमारी पहचान को समझने में मदद करता है, वरन् व्यक्तिगत विकास और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक है । अपने गुणों, कमियों और इच्छाओं, आंकांक्षाओं पर विचार करें। क्या आप अपनी क्षमताओं और कमजोरियों को समझते हैं ? जैसे आपके अंदर काम को कल पर टालने की आदत है, तो उसे छोड़ने का प्रयास करें। इस तरह से आप स्वयं बेहतर तरीके जान कर अपने जीवन में लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं।
आभार व्यक्त करना सीखें – अपने जीवन में जो कुछ भी प्राप्त है, उसके लिए आप आभार व्यक्त करें। रोज सुबह नये अच्छे दिन के लिए भगवान् का आभार व्यक्त करें। यह आपके जीवन में सकारात्मक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने में मदद करेगा। हर दिन एक – दो चीजें कागज पर लिखें, जिनके लिए आप आभारी हैं। आस-पास के लोगों से आभार प्रकट करने के लिए धन्यवाद कहने की आदत डालें।
रचनात्मक गतिविधियों पर ध्यान लगाएं –
रचनात्मक गतिविधियाँ न केवल आपके दिमाग को सक्रिय रखती हैं, वरन् मानसिक स्वास्थ्य और भावनात्मक संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। जब आप किसी रचनात्मक गतिविधि में सक्रिय रहते हैं, तब आप अपने विचारों-भावनाओं को व्यक्त करने का माध्यम पा जाते हैं। यह आपको जीवन को नये दृष्टकोण से देखने का अवसर देता है।
स्वयं को व्यक्त करें – अपनी भावनाओं और विचारों को दूसरों के समक्ष व्यक्त करें। इससे मन हल्का होता है। यह आपके मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है। इसके साथ यह आपके व्यक्तित्व को उजागर करता है जब आप दूसरों के सामने अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हैं तो आसपास के दूसरे लोग आपको अच्छी तरह समझ पाते हैं।
स्वयं के लिए समय अवश्य निकालें-
स्वयं के लिए समय निकालना अति आवश्यक है, जो आपके मानसिक, शारीरिक और भावनात्मक स्वास्थ्य को सुदृढ़ बनाता है। जब आप अपने लिए समय निकालते हैं, तो आप न केवल अपनी भलाई के विषय में सोचते हैं, वरन् शारीरिक और मानसिक ऊर्जा को पुनः चार्ज कर लेते हैं। जब आप अपनी जरूरतों को जानते-समझते हैं, तभी आप दूसरों की जरूरतों को समझ कर उनकी मदद कर पाते हैं। इसलिए इसी नवरात्रि से अपने लिए समय निकालें।
सेवा कार्य में भाग लें-
जब आप किसी दूसरे की सेवा करते हैं, तो आपको आंतरिक खुशी मिलती है, और सकारात्मकता आती है। जब हम समाज के लिए कुछ करते हैं, तो बेहतर समाज का निर्माण होता है। दूसरे हमारे मन को खुशी और संतोष का अनुभव होता है। इसलिए सेवा कार्य को जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाएं और समाज में सकारात्मक बदलाव लाएँ।
स्वस्थ जीवन शैली अपनाएं –
स्वस्थ जीवन शैली में केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं, वरन् मानसिक, भावनात्मक और सामाजिक स्वास्थ्य को भी शामिल करती है। स्वस्थ जीवन शैली से हम न केवल बीमारियों से बचते हैं, वरन् जीवन की गुणवत्ता को भी बनाए रखते हैं। संतुलित आहार लें, दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। यह आपके शरीर को हाइड्रेट रखने में मदद करता है। नियमित व्यायाम करने की आदत डालें।
लक्ष्य निर्धारित करें–
लक्ष्य निर्धारित करना सफलता की दिशा में पहला कदम है। छोटे और तत्काल लक्ष्य निर्धारित करें, जो आपको दीर्घकालिक लक्ष्य की ओर बढने में मदद करेगा।
लक्ष्य हेतु आवश्यक योजना बनाएं –
हर लक्ष्य के लिए समय सीमा निर्धारित करें। यह आपको लक्ष्यों को समय पर पूरा करने के लिए प्रेरित करेगा। जब भी अपने लक्ष्य को पाने के किसी छोटे चरण को पूरा करें, उसके लिए स्वयं अपने लिए ताली बजा कर खुशी मनाएं।
इस तरह नवरात्र के ९ दिनों में देवी के रूपों की आराधना के साथ स्वयं के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव होगा, जो माँ दुर्गा की सच्ची भक्ति और उपासना होगी।