लोकार्पण…
इंदौर (मप्र)।
लेखिका को चार साहित्यिक संततियों के जन्म की बधाई देता हूँ। मालवी संग्रह के लिए विशेष बधाई। परिवार का ध्यान रखते हुए किया गया यह साहित्य सृजन अत्यंत प्रशंसनीय है।
यह बात शहर की लेखिका ज्योति जैन की ४ पुस्तकों का लोकार्पण करते हुए मुख्य अतिथि म.प्र. साहित्य अकादमी के निदेशक डॉ. विकास दवे ने कही। लोकार्पण एवं परिचर्चा का यह आयोजन शिवना प्रकाशन के तत्वावधान में हुआ, जहां वक्ताओं ने लेखिका के रचनाकर्म पर अपने विचार व्यक्त किए।
कार्यक्रम का प्रारंभ भारती भाटे द्वारा वन्दे मातरम गान, दिव्या मंडलोई द्वारा सरस्वती वंदना और अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जवलन के साथ हुआ। स्वागत व्यक्तव्य में पंकज सुबीर ने अतिथियों और जनसमूह का स्वागत किया, एवं लेखिका को चूल्हे-चौके से निकल कर किताबों का चौका लगाने पर बधाई दी। तत्पश्चात ज्योति जैन की ४ चर्चित कृतियों- ‘घूरना मना है’, ‘मूँडो देखी ने तिलक काढ़े’, ‘षष्ठीपूर्ति’ और ‘प्रतिनिधि कहानियाँ’ का लोकार्पण किया गया। लोकार्पण के बाद ज्योति जैन ने अपनी रचना प्रक्रिया पर कहा कि उपस्थितजन ब्रह्माण्ड के सितारे और नक्षत्र हैं और उनके स्नेहाशीष ने ही उन्हें ‘ज्योति’ बनाया है। अपने व्यंग्य लेखन की शुरुआत से जुड़े संस्मरण भी सुनाए, साथ ही पूर्व केंद्रीय मंत्री की सहजता की प्रशंसा की।
इस कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रसिद्ध आलोचक एवं व्यंग्यकार बी.एल. आच्छा ने की। उन्होंने कृतियों की गहराई और सार्थकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि व्यंग्य विधा आलोचना नहीं, बल्कि तर्क का विषय है। जीवन को बोनसाई करने की नहीं, बल्कि छांह देने की जरूरत है।
कार्यक्रम में पूर्व मंत्री सत्यनारायण जटिया का स्वागत लेखिका ज्योति जैन ने किया। अन्य अतिथियों का स्वागत शरद कुमार जैन और डॉ. शोभा प्रजापति ने किया।
समारोह के दौरान हेमंत बड़जात्या, और विजयलक्ष्मी द्वारा अतिथियों को स्मृति चिह्न भेंट किए गए। भारती भाटे, दिव्या मंडलोई और कार्यक्रम का सफल संचालन करने वाली स्मृति आदित्य को स्मृति चिह्न दिए गए।
स्वर्णिम माहेश्वरी ने आभार प्रदर्शन किया।