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खुशियों के दीप जलाएं…

हरिहर सिंह चौहान
इन्दौर (मध्यप्रदेश )
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हर घर उजियारा हो (दीपावली विशेष)…

खुशियाँ बहुत हैं कम यहाँ,
इसे यूँ ही मत जाने दो
स्नेह और उमंग के संग हम,
त्योहार हर्ष मनाएं,
आओ, खुशियों के दीप जलाएं…।

अँधेरा बहुत हो चुका जीवन में,
अंतर्मन में उजास की ज्योति जला
हम पर्व और त्योहार मनाएं,
आओ, खुशियों के दीप जलाएं…।

दीप-पर्व आया, मन में खुशियाँ लाया,
इस क्षण को यूँ ही मत जाने दो
घर-आँगन को सजाएं, रंगोली सजाएं,
आओ, खुशियों के दीप जलाएं…।

बहुत भाग चुके इस आपा-धापी में,
अब कुछ पल घर-आँगन, परिवार संग बिताएं।
फुलझड़ी, अनार, चकरी संग फिर से बच्चे बन जाएं,
आओ, खुशियों के दीप जलाएं…॥