अजय जैन ‘विकल्प’
इंदौर (मध्यप्रदेश)
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दीपावली विशेष…
आओ एक दीप जलाएँ, हर अँधेरा मिटाएँ,
मन का मैल धोकर, हम सबको गले लगाएँ॥
न कोई ऊँचा है, न कोई नीचा यहाँ,
हर दिल में बसता है, एक ही जहाँ।
दीप नहीं पूछता, किसका है ये घर,
उजाला सबका है, यही सबको बताएं।
आओ एक दीप जलाएँ, हर अँधेरा मिटाएँ…॥
जो भूखा है उसको, रोटी भी खिलाएँ,
जो रूठा है उसको, हँसकर मनाएँ।
आओ इस दीवाली, ये प्रण हम करें,
नफ़रत को भुला कर, प्रेम बढ़ाएं।
आओ एक दीप जलाएँ, हर अँधेरा मिटाएँ…॥
हम मिलकर ऐसा, सुंदर संसार रचें,
जहाँ हर दिल में, बस प्यार ही प्यार बसे।
छोटा-बड़ा कोई नहीं, सब बराबर हों,
दीप पर्व पर यही, सच्चा त्योहार बनाएँ।
आओ एक दीप जलाएँ, हर अँधेरा मिटाएँ…॥
एक दीप जलाकर, सौ दीप जलाएँ,
घर-घर में खुशियों की, रोशनी फैलाएँ।
दिल से दिल मिले, तो दूरियाँ मिट जाएँ,
इस दीप पर्व पर, सब अपने कहलाएँ।
आओ एक दीप जलाएँ, हर अँधेरा मिटाएँ…॥
मन की कड़वाहट को, आज हम भुलाएँ,
माफ़ी और ममता से, हर रिश्ता सजाएँ।
जहाँ अँधेरा हो, वहाँ दीप जलाएँ,
प्यार की लौ से ही, ये जग जगमगाएँ।
आओ एक दीप जलाएँ, हर अँधेरा मिटाएँ…॥