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राधे और कृष्ण

नीलम प्रभा सिन्हा
धनबाद (झारखंड)
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गले में जो तुलसी माला पहने,  
उस पर माखन चोर की नज़रें
जो मोर मुकुट की माला पहने,  
उस पर संसारी चोर की नज़रें।

पहचान है मेरी तुलसी माला,  
तिलक माथे पर गोल और लंबा
यही राधे-कृष्ण की पहचान रहे,  
राधे-कृष्ण की भक्ति का अभिमान रहे।

किशोरी जू की विरह अवस्था है ऐसे,
कृष्ण के पीतांबर को छूकर हवा 
जब बरसाने आकर, राधा का आँचल छूती,  
राधा की मूर्छा टूटे ही टूटे।

बरसाने की राधा का आँचल छूकर जब हवा,  
कृष्ण के पीतांबर को छूती
राधे की खुशी और खुशबू कृष्ण महसूस करते,  
चेहरे पे कृष्ण के मधुर मुस्कान छा जाती।

मेरा संबंध राधे आपसे ही है,  
आप कृपा कर देतीं, तो मैं खिल जाती।
तुम ही हो, जिसे जग आराधे प्रति पल, राधे,  
कृष्ण तुम्हें हर पल आराधें, मेरी राधे॥