गली-गली धुंध
आचार्य संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )*************************************************** गाँव-गली, शहर-नगर तक छाया धुँआ-धुँध,ठंडे में सन्नाटा पसरा, प्रदूषित ओस की बूँदरुकी रफ्तार ट्रक, बस, कार की, धुंध आँखें मूंद,कश्मीर-हिमाचल की ठंड को छोड़ो बर्फबारी अंधाधुंध। ठिठुरन-जकड़न में जन जीवन, आँखें हुई है कुंद,शीतलहर से सभी त्रस्त थे, खेल रहे हैं बाल मुकुंदखेतों में हरियाली आई, सरसों पीले फूल … Read more