कवि हृदय
बबीता प्रजापति झाँसी (उत्तरप्रदेश)****************************************** संवेदना है,वेदना हैशब्दों की बौछार है,कवि हृदय को सदा-सर्वदाशब्दों से ही प्यार है। प्रेम है,हृदय हैसो फूलों में पराग है,जग में इनके बिनाविरक्ति हैवैराग है…। स्वप्न है,कल्पना हैइनका अपना लोक है,जग में बाहर क्या धरा ?दु:ख है या शोक है…। गहन निशा हो,या साँझ होसब इनको स्वीकार है।भोर का वंदनललाट चंदन,प्रातः का … Read more