सदा खुशबू रचती नारी

कुमारी ऋतंभरामुजफ्फरपुर (बिहार)************************************************ नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… कई संघर्षों के बीच,कई कटाक्षों के पारकटी-कटाक्ष अपमान के बीच के बाद,संघर्षों से संघर्ष करगालियों-घरों के अंदर,सदैव खुशबू फैलाती है नारी। पसीने से लथपथ चेहरा,जख्मों से भरे हाथघिसे नाखूनों वाली नारी,फूल-से कोमल हाथ, जख्म सहते हाथदर्द सहते, चोट खाते हाथ,यही हाथ खुशबू रचते हैंसंघर्ष करते हैं ऐसे … Read more

मस्ती लेकर आई होली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* होली मस्ती लेकर आई, खेल रहे कन्हाई,बरसाने से राधारानी, दौड़ी-दौड़ी आई।खेल रहे ग्वाले-ग्वालाएँ, मुखड़े हैं रंगीन-रंग-अबीरों की आभा तो, सारे ब्रज में छाई॥ खेल रहे देवर-भौजाई, उल्लासित है तन-मन,जीजू और सालियाँ खेलें, इतराता है आँगन।मची हुई हुड़दंग आज तो, हुरियारों का ज़ोर-लगता है पल में जी लेंगे, अब तो सारा जीवन॥ … Read more

नारी शक्ति का नया युग और चुनौतियाँ

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता…. मानव सभ्यता के विकास की कथा में यदि किसी शक्ति ने सबसे अधिक सृजन किया है, तो वह नारी शक्ति है। वह जीवन की जननी है, संस्कृति की वाहक है और समाज की संवेदनशील आत्मा है। भारतीय परम्परा ने नारी को केवल एक सामाजिक भूमिका तक सीमित … Read more

भरे रंग

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** भरे रंग पीली सरसों मेंयह बसंत है सरसाया,प्रकृति हुई है रंग-बिरंगीदेखो फिर फागुन आया। सजी हुई छवि जड़-चेतन कीमन-उमंग भर-भर जाए,पुष्पित कमल-कली उपवन मेंगुन-गुन भँवरे गीत सुनाएँ। पुलकित अंग-अंग धरती काऋतुपति सौरभ बिखराए,वृक्षों पर नव-कोपल आएपादप रसाल बौराए। फसल हुई स्वर्णिम कंचन-सीफागुन ख़ुशियाँ ले आया,चंचल मतवाली बयार मेंनृत्य मयूर ने दिखलाया। झाँझ … Read more

है शक्ति स्वरूपा

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ नारी:संघर्ष, शक्ति, समाज और सफलता… सशक्त शक्ति का वह रूप है,मन में लिए जो ‘कोमलता’विशाल ‘हृदय’ में दया व करुणा का संचार लिए,नारी देवी है, वह है, शक्ति स्वरूपा। उनकी ‘उड़ान’ दूर आसमान की,उन्हें आगे बढ़ने दो, ‘रोको’ मत तुमनारी को कमजोर कभी ‘मत’ समझना,नारी ‘देवी’ है, वह है, शक्ति … Read more

आग का दरिया:क्या होगा भविष्य

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** २८ फरवरी २०२६ की वह रात मध्य-पूर्व के इतिहास में एक ऐसे मोड़ के रूप में दर्ज होगी, जिसे आने वाली पीढ़ियाँ शायद ही भुला सकें। ठीक रात २ बजकर ३० मिनट पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक ८ मिनट का वीडियो बयान … Read more

५ बाल साहित्य सम्मान घोषित

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लखनऊ (उप्र)। उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान द्वारा संचालित बाल साहित्य संवर्द्धन योजना के अन्तर्गत वित्तीय वर्ष २०२६-२६ के बाल साहित्य सम्मानों हेतु गठित समिति की संस्तुति घोषित कर दी गई है। इस अनुसार वर्ष २०२४ के ५ बाल साहित्यकारों को अभिनन्दित किया जाएगा।प्रधान सम्पादक डॉ. अमिता दुबे के अनुसार सुभद्रा कुमारी चौहान महिला बाल साहित्य … Read more

किसे यक़ीन था…

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* मुझे पता है कोईठहरता नहीं किसी के पास,रुक जाता है कुछ पल के लिएसाथ देता हैं चंद कदमों तक…। फिर भी न जाने मनभागता है उस ओर शायद,ये सोचकर कि अचानक मिल जाएवो कभी किसी मोड़ पर…। पथिक हैं सब जीवन पथ केअलग-अलग है आप-बीती,कैसे किस पर विश्वास करेंजब बिछे हैं … Read more

फागुन लेकर आ गया

राजबाला शर्मा ‘दीप’अजमेर(राजस्थान)******************************************* होली विशेष…. फागुन लेकर आ गयाभांति-भांति के रंगढोल-नगाड़े बज रहे,बाजे ताल-मृदंग। चौराहे और चौक सब,हो रहे रंग से लालगली-गली हुड़दंग है,उड़े अबीर-गुलाल। तन-मन में उल्लास है,छाई नई उमंगफागुन लेकर आ गया,भांति-भांति के रंग। हर्षित है चेहरे सभी,अधरों पर मुस्काननैनों में है बांकपन,गोरी चतुर-सुजान। नाच रहे मदमस्त हो,पी ली जैसे भंगफागुन लेकर आ … Read more

बहुआयामी हैं कामकाजी महिलाओं की समस्याएं

पूनम चतुर्वेदी शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************** भारतीय समाज में जब कोई महिला यह निर्णय करती है, कि वह घर की चहारदीवारी से बाहर निकल कर कार्यस्थल पर अपनी प्रतिभा और परिश्रम से जीवन का निर्माण करेगी, तो यह निर्णय केवल आजीविका का नहीं, एक समग्र जीवन-दर्शन का, एक साहसिक चुनाव का प्रतीक होता है। वह महिला जानती … Read more