सूरज सोया ओढ़ रजाई
डॉ. कुमारी कुन्दनपटना(बिहार)****************************** वृक्ष-पात से नीर झरे,धुंध ही धुंध दिखाई पड़ेहाड़ कम्पाती ठंडक आई,सोया सूरज ओढ़ रजाई। बोला अब ना निकलूंगा,अब करना मुझे विश्रामचलते-चलते थक जाता हूँ,पहर और आठों याम। सुन माँ अदिती दौड़ी आई,प्यार से कुछ बातें समझाई।उठ जा बेटा फेंक रजाई,समझ जरा तू पीड़ पराई। देख धरा पर कैसी हलचल,जीव-जंतु सब हो रहे … Read more