इश्क़ के रूप
गीतांजली वार्ष्णेय ‘ गीतू’ बरेली(उत्तर प्रदेश) ************************************************************************* स्नेह,मोहब्बत,प्रेम,प्यार, इश्क़ के ये संगी चार। परस्पर प्रेम मानव का, है सुखी जीवन का आधार। माँ प्रेम से हो अभिभूत, शिशु को दूध पिलाती है। कृष्ण रूप देख शिशु में, इश्क ममता बन जाती है। ले आलिंगन में प्रिय को, लैला-मजनूं की कथा सुनाते हैं। तोड़ लाऊँ चाँद … Read more