नारी के रंग, होली के संग

बबिता कुमावतसीकर (राजस्थान)***************************************** हर पल-हर क्षण का रंग बदल जाता,कभी स्नेह का आँचल फहरा जाताआशा का स्पंदन कभी ठहर जाता,बाल्यकाल गुलाबी सपनों कीलाली साथ में लेकर आता। इंद्रधनुषी मुस्कान कोयौवन हमेशा साथ लाता,कभी पीड़ा का धूसर रंगभी विरह अपने में समेट लेता। मुख पर धैर्य सजा रखती है,अडिग विश्वास भी हमेशा होतामाँ बनकर वह पीत … Read more

तेरी वो प्यारी छवि

नीलम प्रभा सिन्हाधनबाद (झारखंड)********************************************* कण-कण गवाह मथुरा के,मेरे कृष्ण जन्म लिए वहाँअंगूठे पर खड़े होकर,भीड़-भरी आबादी में। जो देखा मैंने उस दिन,कृष्ण की अनोखी छवि वहाँकाले-काले घुँघर बालों वाले,हँसता-हँसता श्याम चेहरा। भूल न पाऊँ एक पल भी,तेरी वो प्यारी-प्यारी छविकाली-काली वो अनूप छाया,सिर्फ़ एक पल आँखों में बसी। आँखों के अंदर ही रहना,मेरा दिल तुझको … Read more

रुद्राक्ष हो या इंसान… ‘एकमुखी’ बहुत कम मिलते

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** सतरंगी दुनिया… ‘ईमानदारी’ का महत्व इसी बात से समझ में आता है, कि जो व्यक्ति स्वयं गलत काम करता है, परंतु अपने नौकर से ईमानदारी की अपेक्षा करता है। वफादार सभी कोई चाहते हैं, परन्तु स्वयं कोई बनता नहीं चाहता। “हमारे देश में सरकारी अस्पताल का मतलब है-जान से … Read more

आप आराध्य हैं

प्रीति तिवारी कश्मीरा ‘वंदना शिवदासी’सहारनपुर (उप्र)************************************************** आप हैं देवता, आप आराध्य हैं।भक्ति से हैं सुलभ शेष दु:साध्य हैं॥ सबके हित आपने है सदा विष पीया,आप त्यागी परम तब ही सब जग जीया।कर्म फल सबको देने को पर बाध्य हैं,आप हैं देवता, आप आराध्य हैं…॥ सारी योनि में भोगों में ‌बस आप हैं,बह्म-चिंतन में योगों में … Read more

‘श्री नरेश मेहता के खण्ड काव्य और जीवन-दर्शन’ का विमोचन किया निदेशक डॉ. दवे ने

इंदौर (मप्र)। ‘वीणा’ के सम्पादक राकेश शर्मा की कृति ‘श्री नरेश मेहता के खण्ड काव्य और जीवन-दर्शन’ का विमोचन चेन्नई के साहित्यकार बी.एल. आच्छा, हिन्दी साहित्य अकादमी मप्र के निदेशक डॉ. विकास दवे और श्री मध्य भारत हिंदी साहित्य समिति इंदौर के प्रधानमंत्री अरविंद जवलेकर ने किया। श्री मेहता के जन्मदिन पर हुए इस विमोचन … Read more

द्विमुख चेहरे

कमलेकर नागेश्वर राव ‘कमल’,हैदराबाद (तेलंगाना)*************************************************** मुझसे ही बातों की माला पिरोने का वादा करते,मुझे ही अपना संसार बताने का दावा करतेसच्चाई की छाया बन साथ चलने की बातें करते,और मुस्कानों के पीछे दूसरा मार्ग चुन लेते। “तुम ही मेरा विश्व हो” कहकर जताते अपनापन,पर दुनियाभर से भी रखते सम्बंधमुझे अनजान रखकर किसी और की चौखट … Read more

हमारी पीढ़ी छोड़कर…

संजय एम. वासनिकमुम्बई (महाराष्ट्र)************************************* आज के दौर में ‘सीनियर सिटीजन’कहलाती हमारी पीढ़ी है,आने वाले दस-पंद्रह बरस मेंजो लुप्त होने की कगार पर है,हमारी पीढ़ी बिल्कुल ही अलग हैयह पीढ़ी संसार को छोड़कर जाने वाली है। रात को जल्दी सोने वाली,सुबह को जल्दी उठने वालीभोर में टहलने निकलने वाली,आँगन में पौधों को पानी देने वालीपूजा के … Read more

कैसा मंजर आया ?

डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* खुशियों के इस आशियाँ में, अब अँधियारा छाया है।मजबूरी के बँधन बन गये, कैसा मँजर आया है॥ दो रूह एक जान हुए थे, प्यार ही प्यार समाया था,आसमान के तारे भी तब, झोली में भर लाया था।बदले हैं ये तेवर इनके, कैसी छाई माया है,खुशियों के इस आशियाँ में, … Read more

बालियाँ और लोरियाँ

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* धीरे-धीरे विदा हो रही है संध्या बांधे पैरों में पायल,रुनझुन-रुनझुन पायल बजती जा रही है हरपलसरसर-सरसर पवन घूम रही, हल्की-हल्की हलचल,कभी छूती लताओं को, कभी छूती जा रही तरुदल। गेहुँओं की नवजात बालियाँ हैं बड़ी ही मासूम-मासूम,कंटीली रोयें पहनकर अभी झूमने लगी है गुमसुमलोरियाँ ही लोरियाँ गाई जा रहीं, हर प्रहर … Read more

शिक्षा में न्यायपालिकाःसंवाद की जरूरत है, विवाद की नहीं

ललित गर्ग दिल्ली*********************************** एक बार फिर शिक्षा से जुड़ा एक प्रश्न राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में है। शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) द्वारा प्रकाशित आठवीं कक्षा की सामाजिक विज्ञान की पुस्तक में ‘हमारे समाज में न्यायपालिका की भूमिका’ शीर्षक, वाले अध्याय में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार और लंबित मुकदमों का उल्लेख … Read more