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हिंदी है हिंद को जोड़ती…

उमेशचन्द यादव
बलिया (उत्तरप्रदेश) 
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हिंदी  दिवस स्पर्धा विशेष………………..


हिंदी है हिंद को जोड़ती
किसी को नहीं है छोड़ती,
चाहे अमीर या हो गरीब
यह नाता सबसे जोड़ती।

कवियों को जीवन ज्योति मिले
मन में कविता के सुमन खिले,
हर दिल को है टटोलती
हिंदी है हिंद को जोड़ती।

चौदह सितम्बर को राजभाषा का
दर्जा जब हिंदी को मिला,
सच कहते हैं हर नागरिक का
मन,सुमन-सा था खिला।

हिंदी की लिपि है देवनागरी
शुद्धता में नहीं कोई मिशाल,
गाँव-शहर हो या हो डगरी
इसका क्षेत्र है बहुत विशाल।

हिंदी हर घर की भाषा है
लोरी इसकी परिभाषा है,
यह राज है दिल की खोलती
हिंदी है हिंद को जोड़ती।

हिंदी ने हमें संस्कार दिया
सबसे बड़ा परिवार दिया,
तुलसी की कीर्ति है बोलती
हिंदी है हिंद को जोड़ती।

हिंदी तो हमारी जान है
यह भारत की पहचान है,
रिपु पर भी छाप है छोड़ती
हिंदी है हिंद को जोड़ती।

कहें उमेश हिंदी से हम हैं
दुनिया में न किसी से कम हैं,
अधिकांश आबादी हिंदी है बोलती
यह तो हर दिल को है टटोलतीll

परिचय-उमेशचन्द यादव की जन्मतिथि २ अगस्त १९८५ और जन्म स्थान चकरा कोल्हुवाँ(वीरपुरा)जिला बलिया है। उत्तर प्रदेश राज्य के निवासी श्री यादव की शैक्षिक योग्यता एम.ए. एवं बी.एड. है। आपका कार्यक्षेत्र-शिक्षण है। आप कविता,लेख एवं कहानी लेखन करते हैं। लेखन का उद्देश्य-सामाजिक जागरूकता फैलाना,हिंदी भाषा का विकास और प्रचार-प्रसार करना है।