वही सच जान पाता है
गोपाल मोहन मिश्रदरभंगा (बिहार)***************************************** हराया है तूफ़ानों को, मगर अब ये क्या तमाशा है,हवा करती है जब हलचल, बदन ये कांप जाता है। है सूरज रौशनी देता, सभी ये जानते तो हैं,है आग दिल में बसी कितनी, न कोई भाँप पाता है। है ताकत प्रेम में, पिघला दे पत्थर लोग कहते हैं,पिघल जाता है जब … Read more