शिकायत क्यों ?

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ********************************************************** गुजरते वक्त से हमको भला कोई शिकायत क्यों,गुजरना काम है उसका करें उसकी खिलाफत क्यों ? निभाई दुश्मनी ता-उम्र हमसे दोस्ती करके,कभी मैं सोचता हूँ आज…

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नफ़रतों का ज़ख्म

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* उसके आने का शुरू जब सिलसिला हो जाएगा।नफ़रतों का ज़ख्म यारों फिर हरा हो जाएगा। मौज-मस्ती से सूकूं से कट रही थी ज़िन्दगी,किसने जाना…

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बोझ उतार कर जाना

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* बोझ सारे उतार कर जाना।अब न शेखी बघार कर जाना। इससे मिलता नहीं कहीं कुछ भी,अब जुनूं मत सवार कर जाना। माँगने से नहीं…

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ऊनी मुहब्बत में सारी ठंड

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)****************************************** ये बर्फ़ीली हवाएँ तेज़ तूफ़ाँ ये मिज़ाजी ठंड।मुक़ाबिल तुमको पाकर हो गई कितनी गुलाबी ठंड। तुम्हारी याद की इक गुनगुनी-सी धूप के दम पर,सुखाए…

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इस तरह भी तो आया करो

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* करम का इधर भी तो साया करो।कभी इस तरह भी तो आया करो। ज़रा प्रेम से पेश आया करो।नहीं रोज़ नख़रे दिखाया करो। लहू…

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करूं कुछ कर्म…

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************* रचनाशिल्प:१२२२ १२२२ १२२२ १२२२ करूं कुछ कर्म मैं ऐसे, कि भवसागर से तर जाऊं।मिला है प्यार जो सबसे उसी से मैं निखर जाऊं। मुझे…

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मगरुर

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* हसींं भरपूर होते जा रहे हैं।मगर मगरुर होते जा रहे हैं। ज़रा मशहूर होते जा रहे हैं।नगर का नूर होते जा रहे हैं। बड़े…

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नहीं नासूर होना चाहिए

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* ज़ख़्म बढ़कर अब नहीं नासूर होना चाहिए।दर्द कोई है अगर तो दूर होना चाहिए। है ज़रूरी मश्वरे की जाँच हो हर तौर से,मश्वरा गर…

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दिलों में हूँ

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)****************************************** तन्हाइयों में हूँ न कहीं महफ़िलों में हूँ,मुझको तू ढूँढता है कहाँ मैं दिलों में हूँ। मैं तेरे हर क़दम पे तेरा हमक़दम हूँ…

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मेरी ‘शोभा’ मेरा शबाब

हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़) ********************************************* रचनाशिल्प:२२१२ १२२२ २१२१ २२ इक पौध पर खिले हम, जिसका खिताब तुम हो।हूँ खार शाख पर मैं, उसका गुलाब तुम हो। मुरझा कभी न…

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