नाम कर

विनोद सोनगीर ‘कवि विनोद विनम्र’इन्दौर(मध्यप्रदेश)************************************* चुपचाप अपना तू काम कर,जग में फिर अपना नाम कर। जहां मिलता हो सुकून तुझे,रुक कर वहीं पर शाम कर। तराश खुद को कोहिनूर-सा,ऊंचा अपना फिर दाम कर। लक्ष्य की और बढ़ते जाना,रुक कर रस्ता न जाम कर। राज की बातें राज ही रख,उनको जग में न आम कर। ‘विनम्र’ … Read more

मज़हब को हथियार मत बनाओ

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* इसको लड़ाई का अब आधार मत बनाओ।मज़हब को आज हरगिज़ हथियार मत बनाओ। जीवन को इस तरह से बीमार मत बनाओ।आँगन में मेरे भाई दीवार मत बनाओ। दरबार मत सजाओ काटो न बात सबकी,इस तौर लेखनी को तलवार मत बनाओ। कुछ कामकाज़ कर लो छोड़ो भी मस्तियाँ अब,सप्ताहभर दिनों … Read more

दूरियाँ नहीं रखते

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* प्यार से बुलाते हैं।प्यार ही सिखाते हैं। जो मिलें दबे कुचले,हम गले लगाते हैं। हैं दलित भी मान वही,क्यूँ इन्हें भगाते हैं। जो मिले ग़रीबी में,साथ मिल के खाते हैं। झिड़कियाँ नहीं देते,साथ में बिठाते हैं। दूरियाँ नहीं रखते,दिल से दिल मिलाते हैं। मान जो नहीं पाते,मान हम दिलाते … Read more

दिन कैसा होगा!

विजयलक्ष्मी विभा इलाहाबाद(उत्तरप्रदेश)************************************ ये न पूछो कि जो दिन आयेगा कैसा होगा,कश्तियाँ मोम की और आग का दरिया होगा। कोई दफ़्तर हो कि स्कूल कि पूजा घर हो,सारी बस्ती पे धुआँ ही धुआँ छाया होगा। जब कि बारूद में आँखें ही झुलस जायेंगीं,रोशनी कौन तेरा पूछने वाला होगा। साँप-सा सूंघ गया सबको अचानक पल में,साइरन कोई … Read more

सूरत बदलनी चाहिए

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* देश की हालत संभलनी चाहिए।बद तरीं सूरत बदलनी चाहिए। अब सियासतदान की हरकत कोई,आम जनता को न खलनी चाहिए। जिस पे राज़ी हो सके दोनों फ़रीक़,राह कुछ ऐसी निकलनी चाहिए। माफिया के राज का हो खात्मा,दाल उनकी अब न गलनी चाहिए। जीतनी बाज़ी अगर शतरंज की,सोच कर हर चाल … Read more

कुछ नहीं नामुमकिन

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* ये पता सभी को है पूछ लो ज़माने से।तुम कभी नहीं थकते छुट्टियां मनाने से। चाह हो अगर दिल में कुछ नहीं है नामुमकिन,रास्ता निकल आता रास्ता बनाने से। रायगां नहीं जातीं कोशिशें यक़ीं जानो,मानते सभी रूठे जा उन्हें मनाने से। उम्र झूठ की छोटी भूल कर नहीं बोलो,राजकाज … Read more

कहना पड़ेगा

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* हौंसला गहना पड़ेगा।कुछ न कुछ कहना पड़ेगा। चुप बहुत हम रह लिए पर,दर्द अब कहना पड़ेगा। है मुदावा ही नहीं कुछ,दर्द यूँ सहना पड़ेगा। रब रखे जिस हाल में उस,हाल में रहना पड़ेगा। बोलना नुकसान दे जब,चुप वहाँ रहना पड़ेगा। न्याय की आशा न बाकी,ज़ह्र पी रहना पड़ेगा। रब … Read more

ज़ुल्म पर जहां चुप है

अब्दुल हमीद इदरीसी ‘हमीद कानपुरी’कानपुर(उत्तर प्रदेश)********************************************* तीर चुपचाप है कमां चुप है।जो जहाँ है अजी वहां चुप है। यूँ तो वाचाल है बहुत लेकिन,हो रहा ज़ुल्म पर जहां चुप है। लग रहे हैं अजीब से नारे,धर्म का फिर भी कारवां चुप है। लुट रहा बाग का हरिक पौधा,वज़्ह क्या है जो बागबां चुप है। आज … Read more

निभा नहीं सकते

सरफ़राज़ हुसैन ‘फ़राज़’मुरादाबाद (उत्तरप्रदेश) ***************************************** ज़ख़्म दिल पर जो खा नहीं सकते।दोस्ती वो निभा नहीं सकते। जिनमें जज़्बा नहीं है जलने का,वो अँधेरा मिटा नहीं सकते। ज़ख़्म कितने मिले हैं उल्फ़त में,हम किसी को बता नहीं सकते। वो हमें लाख आज़माएँ पर,हम उन्हें आज़मा नहीं सकते। शिद्दत ए दर्द जान लो ख़ुद ही,हम कलेजा दिखा नहीं … Read more

मिले जो दर्द के पल‌

शंकरलाल जांगिड़ ‘शंकर दादाजी’रावतसर(राजस्थान) ****************************************** रचनाशिल्प: क़ाफ़िया-आते,रदीफ़-हैं सदा मुझको, बहर १२२२,१२२२,१२२२,१२२२ मिले जो दर्द के पल‌ क्यों डराते हैं सदा मुझको,न जाने क्या सबब है क्यों सताते हैं सदा मुझको। मिले अपनों से जो धोखे,ज़िगर घायल मिरा उनसे,चमक जाता हूँ ख़्वाबों में डराते हैं सदा मुझको। हृदय के जख़्म की पीड़ा सहन होती नहीं मुझसे,वही पल … Read more