आया भला जमाना कैसा
डॉ. संजीदा खानम ‘शाहीन’जोधपुर (राजस्थान)************************************** रातें रूठीं दिन है दुश्मन, आया भला ज़माना कैसा,एक अजब सा दु:ख है मेरा, दर्द है ये अनजाना कैसा। आँखें सूनी, सपने टूटे, आहों पर भी पहरा है,अपने ही घर में कैद हुए हैं, क़ैद में ही मर जाना कैसा। फूल चुभे हैं, काँटे महके, मौसम कुछ दीवाना है,कुदरत भी … Read more