मिलें प्रभु जी कभी
हीरा सिंह चाहिल ‘बिल्ले’बिलासपुर (छत्तीसगढ़)********************************************* रचना शिल्प: १२२२-१२२२-१२२२-१२२२ मिलें प्रभु जी कभी दर्शन, सजेगा भी तभी जीवन।दिखें सबको विधाता तो, खिलेंगे साँस में उपवन॥ मिला करते विधाता पर, नहीं पहचान होती है,सजा रखते धरा के कण, यही परवान चढ़ती है।जगत के एक नारायण, वही हैं देवता सबके,हजारों रुप हैं उनके, मिलें दर्शन नहीं जिनके।न बाॅंटो … Read more