नववर्ष

डॉ.एन.के. सेठीबांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* ‘स्वागत, संकल्प, संघर्ष और सफलता’ (नववर्ष २०२६ विशेष)… रचना शिल्प:११२ २११ २१२ १११ २१ नव आशा भर आ गया नवल वर्ष।धरती स्वागत में सजी सुमन हर्ष॥कलियाँ नूतन रूपवान अभिराम।चलती शीतल-सी बयार अविराम॥ शुभ हो ये नववर्ष का नव प्रभात।मन का बाग खिले बने सबल गात॥खुशियों का जग में प्रसार चहुँओर।खिलते पल्लव … Read more

खिली चाँदनी रात

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* खिली चाँदनी रात,चंद्रमा नभ में चमके।तिथी पूर्णिमा आज,धरा भी दम दम दमके॥चारों ओर उजास,तमस को दूर भगाए।धवल रश्मियाँ खूब,सुधा जग में बरसाए॥ देख पूर्णिमा चंद्र,शान्त मन हर्षित होता।अष्ट कला परिपूर्ण,कलानिधि तम को खोता॥शोभित शिव के भाल,मान ये पाता जग में।होकर के परिपूर्ण,प्रकाशित होता नभ में॥ परिचय-पेशे से अर्द्ध सरकारी महाविद्यालय … Read more

दीपावली:करे जग में उजियारा

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* दीप जलें, मन महके (दीपावली विशेष)…. पंच दिवस का पर्व, हर्ष से सभी मनाते।करें स्वच्छ घर द्वार, खीर पकवान बनाते॥दीपों का त्यौहार, करे जग में उजियारा।लक्ष्मी का हो वास, मिटे हर मन अँधियारा॥ धनतेरस का पर्व, खुशी घर-घर में लाए।लक्ष्मी संग गणेश,ऋद्धि और सिद्धि आए॥धन्वंतरि हैं वैद्य, औषधि के हैं … Read more

नीर बादल बरसाते

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* बादल करते शोर, दामिनी दम-दम दमके।भीत कामिनी नार, आसमां चमचम चमके॥बरसे सावन मास, सभी जन हर-हर बोले।पाएं शिव आशीश, नाथ शिव शंकर भोले॥ गाओ मस्त मल्हार, झूम के बादल आए।करते गर्जन घोर, धरा की प्यास बुझाए॥डूबे सड़कें ग्राम, उफनते नदियाँ- नाले।कुदरत का यह खेल, हमें अचरज में डाले॥ भर गए … Read more

छह साल की बच्ची हूँ…

डॉ.आशा आजाद ‘कृति’कोरबा (छत्तीसगढ़)**************************************** मैं हूँ छह साल की बच्ची, बोलो क्या है दोष।बलात्कार को झेल रही हूँ, मुझ पर क्यों है रोष॥ नटखट मेरी सोच जान लें, कुटिल पाप हुए सोच।खेल रहीं मैं नि:स्वार्थ भाव से, फिर भी रहे है नोंच॥ क्या तन मेरा नारी जैसा, क्या तन पर धरा विकास।रिश्ते संग बहलाकर मुझको, … Read more

सतत करें अभ्यास

डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* सतत् करें अभ्यास, काव्य बन जाए न्यारा।बनें काव्य मर्मज्ञ, काव्य रस बहती धारा॥सुधिजन देते मान, सुयश जीवन में खिलता।कवि की सृष्टि अपार,नहीं दुख इसमें मिलता॥ बिना किए अभ्यास, ज्ञान मिट जाता सारा।जीवन हो रसहीन, अकेला मनुज बिचारा॥करिए नित्य सुधार, तभी जीवन बदलेगा।नित्य बढ़ाएं ज्ञान, तमस अज्ञान हटेगा॥ परिचय-पेशे से अर्द्ध … Read more

निगाहें राह तकती

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** चले आओ पनाहों में, निगाहें राह तकती है।बताएं क्या तुम्हें दिलवर, तुम्हीं में जान बसती है॥सुनो सजना तुम्हें मैंने, तहे दिल से पुकारा है।चले आओ सजन मेरे, बड़ा दिलकश नजारा है॥ बहारों ने फिजाओं में, गुलों को यूँ खिलाया है।लगे जैसे कि अम्बर ने, नवल मोती सजाया है॥चले आओ सनम मेरे, … Read more

वेदमाता भवानी

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** वसंत पंचमी: ज्ञान, कला और संस्कृति का उत्सव… करूँगी सदा वंदना मैं तुम्हारी,भवानी सुनो प्रार्थना है हमारी।बना दो विवेकी हरो अंधियारा,पुत्री हूँ तुम्हारी बनो माँ सहारा। मिटा दो भवानी अज्ञता हमारी,करूँगी सदा वंदना मैं तुम्हारी…॥ पता है तुम्हें मैं बड़ी हूँ अज्ञानी,तुम्हीं वेदमाता तुम्हीं हो भवानी।सुनो माँ भवानी पुत्री हूँ तुम्हारी,करो … Read more

सरस्वती वंदना

सुश्री अंजुमन मंसूरी ‘आरज़ू’छिंदवाड़ा (मध्य प्रदेश)****************************************** रचनाशिल्प- २१२२ २१२२ २१२… शारदे यश विद्या बुद्धि ज्ञान दे।माँ तनिक भी मत हमें अभिमान दे॥ श्री कलाधारा सुनासा वरप्रदा।शारदा ब्राह्मी सुभद्रा श्रीप्रदा।भारती त्रिगुणा शिवा वागीश्वरी।गोमती कांता परा भुवनेश्वरी॥पुण्य इस भारत धरा पर ध्यान दे…॥ शारदे यश विद्या बुद्धि ज्ञान दे।माँ तनिक भी मत हमें अभिमान दे॥ ज्ञानमुद्रा पीत … Read more

सुनो कन्हैया

कुमकुम कुमारी ‘काव्याकृति’मुंगेर (बिहार)********************************************** रचनाशिल्प:छंद शास्त्र के अनुसार तंत्री छंद ३२ मात्राओं का सम-मात्रिक छंद है, जिसमें ८, ८, ६, १० मात्रा पर यति का विधान है तथा ८, ८ पर अंत्यानुप्रास होना चाहिए। पदांत में गुरु गुरु (२२) आवश्यक है।सभी छंदों की तरह इसमें भी ४ पद होते हैं। २-२ पद अथवा चारों पद … Read more