मन के रावण का संहार करो
डॉ. गायत्री शर्मा ’प्रीत’इन्दौर (मध्यप्रदेश )******************************************* मन के रावण का करो, तुम पहले संहार।तब ही मिल पाये हमें, इस जीवन का सार॥ गली-गली रावण बना, राम करो उद्धार।मातु-बहन-बेटी यहाँ, होता रहा प्रहार॥ मायावी राक्षस बने, करते हैं प्रतिघात।सुख का सूरज है नहीं, आई दुख की रात॥ रावण जलने की सदा, चलती आई रीत।मन का रावण … Read more