कुरीतियों के जाल में वर्तमान युग
सीमा जैन ‘निसर्ग’खड़गपुर (प.बंगाल)********************************* विकास के शीर्ष पर खड़े होकर जब नज़र घुमाती हूँ तो चमचमाते अनेक प्रशंसनीय पायदानों के नीचे कहीं, अंधेरी… कालिख पुती हुई कुरीतियाँ दृष्टिगोचर होती है। कुछ तो इतनी अविश्वसनीय और हेय होती है कि, आज की उपलब्धियों, सफलताओं पर यक़ीन करना, प्रसन्न होना मुश्किल हो जाता है। मन इतना उचट … Read more