शिक्षा नियुक्ति ही नहीं, मुक्ति का माध्यम बने

ललित गर्गदिल्ली***************************** शिक्षक दिवस (५ सितम्बर) विशेष… शिक्षक दिवस केवल शिक्षकों के सम्मान का अवसर नहीं, बल्कि भारत की शिक्षा-दृष्टि, शिक्षक की भूमिका और भावी पीढ़ी के निर्माण पर गंभीर आत्ममंथन का दिन है। किसी राष्ट्र का भविष्य केवल उसके विद्यालयों की संख्या, भवनों की भव्यता, पुस्तकों की उपलब्धता या परीक्षाओं के परिणामों से निर्धारित … Read more

काले कानूनों से कब मिलेगी पूरी मुक्ति ?

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)*********************************** अंग्रेज चले गए, भारत स्वतंत्र हो गया, लेकिन औपनिवेशिक दौर के अनेक कानून आज भी किसी न किसी रूप में मौजूद हैं। १५ अगस्त १९४७ को भारत ने राजनीतिक स्वतंत्रता प्राप्त की, पर स्वतंत्रता के बाद अनेक पुराने कानून जारी रहे और समय-समय पर उनमें संशोधन हुए। समस्या तब पैदा होती … Read more

प्राकृतिक असंतुलन है ज्यादा बादल फटने की वजह

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)****************************** जब किसी इलाके में एक निश्चित अवधि में अधिक बारिश होती है, तो उसे बादल फटना कहते हैं।       आईएमडी के अनुसार यदि २० या ३० वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में १०० मिलीमीटर बारिश होती है तो उसे बादल फटने की घटना कहा जाता है। उत्तराखंड में बादल फटना एक बेहद खतरनाक और … Read more

नेपाल त्रासदी:भारत को सबक लेने की जरूरत

ललित गर्गदिल्ली***************************** नेपाल में २६ अगस्त को आई विनाशकारी बाढ़ और हिमस्खलन ने एक बार फिर यह कठोर सत्य सामने ला दिया है, कि प्रकृति के साथ खिलवाड़ और पहाड़ों की संवेदनशीलता की अनदेखी मानव सभ्यता के लिए कितनी भारी पड़ सकती है। भोटेकोशी नदी तंत्र में हिम खंड (ग्लेशियर) के बड़े हिस्से के टूटने, … Read more

सांख्य दर्शन:बाह्य जगत् के साथ सूक्ष्म विश्लेषण भी

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* भारतीय दार्शनिक परम्परा में सांख्य दर्शन को अत्यन्त प्राचीन, तर्कप्रधान और विश्लेषणात्मक दर्शन माना जाता है। ‘सांख्य’ का सामान्य अर्थ है—तत्त्वों का सम्यक् ज्ञान अथवा गणना। महर्षि कपिल को इसका आदि प्रवर्तक माना जाता है। सांख्य का मूल प्रयोजन केवल जगत् की व्याख्या करना नहीं, बल्कि मनुष्य को दुःखत्रय … Read more

ए.आई.:बुद्धिहीन बुद्धिमत्ता का व्यापार

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************ कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए.आई.) के बारे में अक्सर यह कहा जाता है, कि यह भविष्य की तकनीक है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र की हालिया चेतावनियों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि इसे जान-बूझकर सुधारा नहीं गया तो यह भविष्य नहीं, बल्कि अतीत के भेदभाव को ही नई गति दे देगी। यह … Read more

नारी की रक्षा नहीं, सामर्थ्य का सम्मान हो

ललित गर्गदिल्ली****************************** रिश्तों का रक्षा-बंधन (रक्षाबंधन विशेष)… रक्षाबंधन केवल कलाई पर बंधा हुआ एक धागा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस विराट चेतना का प्रतीक है जिसमें प्रेम, विश्वास, दायित्व, आत्मीयता और संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। लेकिन बदलते समय में इस पर्व के अर्थ को भी नए सिरे से समझने की जरूरत है। … Read more

कश्मीर:अमेरिकी सुर बदलने से भारत का कद बढ़ा

ललित गर्गदिल्ली******************************* अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का १९ अगस्त को श्रीनगर में दिया गया यह बयान कि जम्मू-कश्मीर “भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा” है, सामान्य कूटनीतिक टिप्पणी मानकर नजरअंदाज करने योग्य नहीं है। यह ऐसे समय आया है, जब कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान की धारणाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार नए समीकरण … Read more

बुजुर्ग की चिता से आधुनिक समाज के लिए उठते सवाल

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)******************************** आज के समय में हम सबने सुख- सुविधाओं के पहाड़ खड़े कर लिए हैं, परंतु रिश्तों की पूँजी घटा दी है। हमारे पास मँहगे फोन हैं, लेकिन माँ-बाप से बात करने के लिए समय नहीं है।   बड़े-बुजुर्गों का कहना था, कि घर की सबसे बड़ी दौलत आँगन में साथ में बैठी पीढ़ियाँ होती हैं। हमारे … Read more

जहाँ हम पीछे, ध्यान देना बहुत ज़रूरी

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*************************************** आज़ादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)… शुभ घड़ी है, शुभ दिवस हैराष्ट्र का संदर्भ है,आइए इस पर्व परकुछ काम की बातें करें।   स्वतंत्रता दिवस के ७९ वर्ष बीत चुके, देखने की और सोचने की बात यह है कि इस बात का विश्लेषण करना चाहिए कि कहाँ हमने ध्यान नहीं दिया। जिन … Read more