नारी की रक्षा नहीं, सामर्थ्य का सम्मान हो

ललित गर्गदिल्ली****************************** रिश्तों का रक्षा-बंधन (रक्षाबंधन विशेष)… रक्षाबंधन केवल कलाई पर बंधा हुआ एक धागा नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की उस विराट चेतना का प्रतीक है जिसमें प्रेम, विश्वास, दायित्व, आत्मीयता और संरक्षण एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। लेकिन बदलते समय में इस पर्व के अर्थ को भी नए सिरे से समझने की जरूरत है। … Read more

कश्मीर:अमेरिकी सुर बदलने से भारत का कद बढ़ा

ललित गर्गदिल्ली******************************* अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर का १९ अगस्त को श्रीनगर में दिया गया यह बयान कि जम्मू-कश्मीर “भारत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा” है, सामान्य कूटनीतिक टिप्पणी मानकर नजरअंदाज करने योग्य नहीं है। यह ऐसे समय आया है, जब कश्मीर को लेकर भारत और पाकिस्तान की धारणाओं के बीच अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार नए समीकरण … Read more

बुजुर्ग की चिता से आधुनिक समाज के लिए उठते सवाल

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)******************************** आज के समय में हम सबने सुख- सुविधाओं के पहाड़ खड़े कर लिए हैं, परंतु रिश्तों की पूँजी घटा दी है। हमारे पास मँहगे फोन हैं, लेकिन माँ-बाप से बात करने के लिए समय नहीं है।   बड़े-बुजुर्गों का कहना था, कि घर की सबसे बड़ी दौलत आँगन में साथ में बैठी पीढ़ियाँ होती हैं। हमारे … Read more

जहाँ हम पीछे, ध्यान देना बहुत ज़रूरी

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)*************************************** आज़ादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)… शुभ घड़ी है, शुभ दिवस हैराष्ट्र का संदर्भ है,आइए इस पर्व परकुछ काम की बातें करें।   स्वतंत्रता दिवस के ७९ वर्ष बीत चुके, देखने की और सोचने की बात यह है कि इस बात का विश्लेषण करना चाहिए कि कहाँ हमने ध्यान नहीं दिया। जिन … Read more

कृत्रिम मेधा:खतरों से सावधानी जरूरी

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)************************************ आज जिस रफ़्तार से ‘कृत्रिम मेधा’ (ए.आई.) हमारे जीवन में प्रवेश कर रही है, उसे देखकर कभी-कभी लगता है जैसे हम किसी ऐसी नदी में तैर रहे हैं जिसका रुख अभी हम पूरी तरह भाँप नहीं पाए हैं। एक तरफ़ चैटबॉट कुछ ही पल में निबंध लिख देते हैं, दवाओं के … Read more

स्वतंत्रता का अतीत और वर्तमान परिदृश्य

डॉ. विद्या ‘सौम्य’प्रयागराज (उत्तर प्रदेश)************************************************ आज़ादी….और आज हम (१५ अगस्त विशेष)… “स्वतंत्रता का अर्थ केवल बेड़ियों का टूटना नहीं है, बल्कि एक ऐसा जीवन है जो दूसरों की स्वतंत्रता का सम्मान और संवर्द्धन करता है।”  नेल्सन मंडेला।     स्वतन्त्रता या आजादी केवल एक शब्द नहीं, बल्कि मनुष्य की मूल प्रवृत्ति, उसकी आत्मा की आवाज और उसके … Read more

राष्ट्रीय एकता और चेतना की प्रेरणा लें विभाजन विभीषका से

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)******************************** प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने २०२१ में ‘विभाजन विभीषका स्मृति दिवस’ मनाने की घोषणा करके उन लाखों लोगों के संघर्ष, बलिदान और विस्थापन के दर्द को राष्ट्रीय स्मृति का हिस्सा बना दिया है, क्योंकि आज की पीढ़ी उस दर्द की पीड़ा से अनजान है। विभाजन के उस दर्द को जानने के लिए हमें … Read more

लोकतंत्र, न्यायपूर्ण सिद्धांत और संयुक्त प्रतिबद्धता है स्वतंत्रता दिवस

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)******************************** आजादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)…. १५ अगस्त हमारे देश के इतिहास की सबसे भाग्यशाली और महत्वपूर्ण तारीख है। लगभग २०० साल के बाद हमारे देश भारत को अँग्रेजी हुकूमत के अत्याचार और गुलामी से इस दिन ही पूर्ण रूप से आजादी मिली थी। यह दिन सभी भारतीयों के लिये बहुत खास … Read more

बलिदानियों से मिली आजादी

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)***************************************** आजादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)… आजादी और आज हम के अंतराल में हम जिनकी वजह से सुखी हैं, वे हैं ‘हमारे’ बलिदानी, जो देश के लिए न्योछावर हुए। देश के अलग-अलग प्रान्तों में जन्मे वीरों ने अपनी-अपनी भूमिका निभाई थी।कई वीरों के नाम हैं, उनमें एक जानकारी के मुताबिक ऐसे … Read more

आत्मनिर्भरता से विकसित भारत की ओर आजादी की उड़ान

ललित गर्गदिल्ली******************************* आजादी… और आज हम (१५ अगस्त विशेष)… १५ अगस्त भारत के राष्ट्रीय जीवन का वह गौरवपूर्ण दिन है, जब हमारी धरती ने पराधीनता की लंबी रात के बाद स्वतंत्रता का सूर्य देखा था। २०२६ में हम स्वतंत्रता का ८० वां दिवस मना रहे हैं। यह केवल अतीत के गौरव को याद करने का … Read more