कागज़ की ढाल
डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** डॉ. विनोद शर्मा ने ३६ घंटे जागकर परीक्षा दी थी। रैंक आई ४७वीं और सीट नहीं मिली। जिसे मिली, उसकी रैंक थी-३१२वीं, नाम था – सुरेंद्र मेघवाल। उसके पास एक प्रमाण-पत्र था, जो काफी था। यह व्यवस्था थी। इसे स्वीकार करना था, पर जब विनोद ने अपना दु:ख कहा, तो सुरेंद्र … Read more