कागज़ की ढाल

डॉ. शैलेश शुक्लालखनऊ (उत्तरप्रदेश)**************************************** डॉ. विनोद शर्मा ने ३६ घंटे जागकर परीक्षा दी थी। रैंक आई ४७वीं और सीट नहीं मिली। जिसे मिली, उसकी रैंक थी-३१२वीं, नाम था – सुरेंद्र मेघवाल। उसके पास एक प्रमाण-पत्र था, जो काफी था। यह व्यवस्था थी। इसे स्वीकार करना था, पर जब विनोद ने अपना दु:ख कहा, तो सुरेंद्र … Read more

नमक का हक़

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** पंद्रह साल से रमेसर उनके घर में था। सेठ हरिप्रसाद उसे बेटे की तरह मानते थे — कम से कम यही कहते थे।रमेसर सब जानता था — कहाँ तिजोरी है, कहाँ चाबी रखती हैं मालकिन, किस रात कोई नहीं रहता।“रमेसर, तू तो घर का हिस्सा है।” सेठजी अक्सर कहते।“हाँ सेठजी, घर … Read more

एक पुड़िया…

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ आज शाम जब दीपक ऑफिस से लौट कर आया, तो घर में बाबूजी के चीखने-चिल्लाने की आवाजें गूँज रही थीं। क्रोधित बाबूजी अपनी भाषा के स्तर को भूल कर गाली-गलौज पर उतर आया करते थे, परंतु ऐसा अवसर बहुत कम ही आया करता था; क्योंकि बाबूजी बहुत शांत स्वभाव के थे। वह … Read more

तुम क्या कर सकते हो ?

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** “अच्छा एक बात बताओ, तुम प्रेम की दीवानगी में मेरे लिए क्या कर सकते हो ?”“शायरी की भाषा में कहूं तो… आसमान का चाँद और सितारे तोड़कर तुम्हारी जींस और अपर में टाँक सकता हूँ!”“वाह… वाह! क्या बात है! अच्छा इसके अलावा…?”“इसके अलावा… तुम इस सारे ब्रह्मांड में मुझे सबसे … Read more

मुफ़्त का नशा

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** बुधिया के गाँव में सरकारी योजनाएं आईं- राशन, गैस, बिजली बिल माफी, नकद। बुधिया खुश था।पहले साल उसने काम छोड़ा।“मिल तो रहा है।”दूसरे साल उसने खेत पड़ोसी को दे दिया।“मेहनत किसलिए ?”तीसरे साल उसके बेटे ने विद्यालय छोड़ा।“पढ़कर क्या करेंगे, फ़्री में सब मिलेगा।”पाँच साल बाद चुनाव आए। नेताजी गाँव में … Read more

एक अधूरा आदमी

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** आज सुबह से ही उसे लक्ष्मी याद आ गई। उस समय एक चोका था, सबसे पहले वह खाने का भोग ठाकुर जी को लगाती थी… उसकी घंटी की आवाज सुन कर सभी अनुमान लगा लेते थे, कि ठाकुर जी को भोग लग गया, अब खाना मिलेगा !जब वह पूजा करने … Read more

चाईनीज माल

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** राकेश एक प्रतिभाशाली छात्र था। हर कक्षा में मेरिट में आता था।कॉलेज की पढ़ाई में भी उसका नाम प्रावीण्य सूची में आया और उसको अपनी पढ़ाई विदेश में करने के लिए छात्रवृति मिली। राकेश पढ़ाई के लिए चीन चला गया। शिजू नामक एक चायनीज छात्रा भी उसके साथ पढ़ती … Read more

सफेद गुलाब

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** आखिरकार उसने दुकान में फ्लेक्स टांग ही दिया। उसका फार्मूला सही बैठा। लड़के-लड़कियों की भीड़ लगना शुरू हो गई। पहले वो फ्लेक्स को पढ़ते, कुछ सोचते, फिर फूल खरीदते। जैसा उसने सोचा था, वैसा ही हुआ। उसे दम मारने की फुरसत नहीं मिल रही थी। दस-पंद्रह वाली गुलाब की कली … Read more

नन्हीं आवाज़

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* सुबह का उजास अभी ठीक से उतरा भी नहीं था, कि बस-स्टैंड के कोने में बैठी गुड़िया ने कूड़े के ढेर से कागज़ बटोरना शुरू कर दिया। उसके हाथों में काँटे चुभते, पर आँखों में दर्द से बड़ी एक जिद चमकती-आज स्कूल के सामने वाले चायवाले से उसे २ … Read more

आ अब लौट चलें उस छाँव में…

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** “राजू! हम यहाँ परदेस में आ तो गए हैं, लेकिन अब इतनी मेहनत नहीं होती। अच्छी-भली हमारी खेती की जमीन थी। खेती-बाड़ी करते थे। पता नहीं, किस झोंक में शहर में मजदूरी करने आ गए। सड़ी गर्मी में खाना भी खुद पकाना पड़ता है। फिर तपती धूप में दिन भर सर पर … Read more