तुम क्या कर सकते हो ?

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** “अच्छा एक बात बताओ, तुम प्रेम की दीवानगी में मेरे लिए क्या कर सकते हो ?”“शायरी की भाषा में कहूं तो… आसमान का चाँद और सितारे तोड़कर तुम्हारी जींस और अपर में टाँक सकता हूँ!”“वाह… वाह! क्या बात है! अच्छा इसके अलावा…?”“इसके अलावा… तुम इस सारे ब्रह्मांड में मुझे सबसे … Read more

मुफ़्त का नशा

डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** बुधिया के गाँव में सरकारी योजनाएं आईं- राशन, गैस, बिजली बिल माफी, नकद। बुधिया खुश था।पहले साल उसने काम छोड़ा।“मिल तो रहा है।”दूसरे साल उसने खेत पड़ोसी को दे दिया।“मेहनत किसलिए ?”तीसरे साल उसके बेटे ने विद्यालय छोड़ा।“पढ़कर क्या करेंगे, फ़्री में सब मिलेगा।”पाँच साल बाद चुनाव आए। नेताजी गाँव में … Read more

एक अधूरा आदमी

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** आज सुबह से ही उसे लक्ष्मी याद आ गई। उस समय एक चोका था, सबसे पहले वह खाने का भोग ठाकुर जी को लगाती थी… उसकी घंटी की आवाज सुन कर सभी अनुमान लगा लेते थे, कि ठाकुर जी को भोग लग गया, अब खाना मिलेगा !जब वह पूजा करने … Read more

चाईनीज माल

डॉ. प्रताप मोहन ‘भारतीय’सोलन (हिमाचल प्रदेश)***************************************************** राकेश एक प्रतिभाशाली छात्र था। हर कक्षा में मेरिट में आता था।कॉलेज की पढ़ाई में भी उसका नाम प्रावीण्य सूची में आया और उसको अपनी पढ़ाई विदेश में करने के लिए छात्रवृति मिली। राकेश पढ़ाई के लिए चीन चला गया। शिजू नामक एक चायनीज छात्रा भी उसके साथ पढ़ती … Read more

सफेद गुलाब

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** आखिरकार उसने दुकान में फ्लेक्स टांग ही दिया। उसका फार्मूला सही बैठा। लड़के-लड़कियों की भीड़ लगना शुरू हो गई। पहले वो फ्लेक्स को पढ़ते, कुछ सोचते, फिर फूल खरीदते। जैसा उसने सोचा था, वैसा ही हुआ। उसे दम मारने की फुरसत नहीं मिल रही थी। दस-पंद्रह वाली गुलाब की कली … Read more

नन्हीं आवाज़

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* सुबह का उजास अभी ठीक से उतरा भी नहीं था, कि बस-स्टैंड के कोने में बैठी गुड़िया ने कूड़े के ढेर से कागज़ बटोरना शुरू कर दिया। उसके हाथों में काँटे चुभते, पर आँखों में दर्द से बड़ी एक जिद चमकती-आज स्कूल के सामने वाले चायवाले से उसे २ … Read more

आ अब लौट चलें उस छाँव में…

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** “राजू! हम यहाँ परदेस में आ तो गए हैं, लेकिन अब इतनी मेहनत नहीं होती। अच्छी-भली हमारी खेती की जमीन थी। खेती-बाड़ी करते थे। पता नहीं, किस झोंक में शहर में मजदूरी करने आ गए। सड़ी गर्मी में खाना भी खुद पकाना पड़ता है। फिर तपती धूप में दिन भर सर पर … Read more

आसरा

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** “तुम्हारी आँखें झपकी जा रहीं…. तुम सो जाओगे और देखना दीए बुझ जाएंगे !”“अभी तक बुझे क्या…? तू आराम से सो, मैं दीयों को नहीं बुझने दूंगा, दीयों में तेल डालता रहूंगा।”घरवाली ने आँखें बंद कर ली। इधर, उसने बीड़ी सुलगा ली ताकि नींद उड़ सके। नींद थी कि जाने … Read more

आत्मनिर्भरता

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** “अरे दीदी! धन्य भाग्य जो आप इधर आईं। देखो, आज आपके सिखाए हुए हुनर से हम रोजाना काफी पैसे कमा लेती हैं। मैं सूट की सिलाई करती हूँ और ये जो अनिता है ना, यह सूट के बचे हुए कपड़ों से डिज़ाइनर फ्राॅक बना देती है। आपके समझाने पर मेरे एक भाई … Read more

फर्नीचर

डॉ. योगेन्द्र नाथ शुक्लइन्दौर (मध्यप्रदेश)***************************************** “सक्सेना साहब! इन दिनों जब भी प्रोफेसर सुशील कुमार मिलते हैं तो घर जरूर बुलाते हैं।”“मुझे मालूम है कि वह क्यों बुला रहे हैं ?”“क्यों शर्मा जी…?”“… अभी उन्होंने ५०-६० लाख का नया फर्नीचर बनवाया है। वह उसी को दिखाने के लिए सभी को आमंत्रित किया करते हैं। मुझे भी … Read more