नमक का हक़
डॉ. शैलेश शुक्लाबेल्लारी (कर्नाटक)**************************************** पंद्रह साल से रमेसर उनके घर में था। सेठ हरिप्रसाद उसे बेटे की तरह मानते थे — कम से कम यही कहते थे।रमेसर सब जानता था — कहाँ तिजोरी है, कहाँ चाबी रखती हैं मालकिन, किस रात कोई नहीं रहता।“रमेसर, तू तो घर का हिस्सा है।” सेठजी अक्सर कहते।“हाँ सेठजी, घर … Read more