होली की रंग-बिरंगी स्मृतियाँ

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)************************************ जूही होली की तैयारियों में व्यस्त थी। लगभग एक हफ्ते पहले से उसने तैयारियाँ शुरू कर दीं थीं, तभी फोन की घंटी बजी थी, प्यारी ननद सीमा थी,-“भाभी, आपने काँजी डाल ली ? ““हाँ दीदी, अभी तो काम खतम करके ही किचन से बाहर आई हूँ।”“आप बताइए, आपकी तो पहली होली है…। … Read more

पारिवारिक और सामाजिक स्थिति सर्वमान्य होनी चाहिए

डॉ. मीना श्रीवास्तवठाणे (महाराष्ट्र)******************************************* नारी से नारायणी (महिला दिवस विशेष)… “यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाःक्रियाः॥”(अर्थ-“जहाँ स्त्रियों की पूजा होती है, वहाँ देवता आनंदपूर्वक निवास करते हैं और जहाँ स्त्रियों की पूजा नहीं होती, उनका सम्मान नहीं होता, वहाँ किए गए समस्त अच्छे कर्म भी निष्फल हो जाते हैं।) यह अर्थपूर्ण श्लोक … Read more

सपना जो सच हुआ

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* मैं जब एम.ए. का विद्यार्थी था, तब मैंने एक दिन नहीं;बल्कि कई दिन सपना देखा था कि मैं बड़े मंच पर एक माइक के सामने खड़ा हूँ, और ज़ोरदार भाषण दे रहा हूँ।सामने भारी भीड़ तालियाँ बजाकर मेरा हौसला बढ़ा रही है, और तारीफ कर रही है, और अगले दिन के … Read more

‘माँ’ सच्ची सारथी

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ ‘माँ’ दुनिया की सबसे बड़ी ताकत है। मैंने अपनी माँ को नहीं देखा, वह मुझे ४ साल की उम्र में छोड़ कर भगवान के घर चली गई थी, पर माँ को हमेशा अपने आसपास ही महसूस किया है। माँ का वात्सल्य, स्नेह, लाड़-प्यार, लोरी कहानी, मानो सभी एहसास से अपने … Read more

महाकुम्भ में बाप-बेटे का धर्म-कर्म

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ “अब फिर मेला शुरू होने वाला है।”“अरे बिट्टू यह मेला नहीं, महाकुम्भ है, जहां धर्म, आस्था व सनातन संस्कृति के दिग्दर्शन होंगे, इसे मेला मत बोलो।”“अच्छा यानी १२ वर्ष में एक बार लगने वाला महाकुम्भ स्नान है, जहां साधु-संत अमृत स्नान करते हैं। जहां अंतरंगी हिमाचल के घोर तपस्वी जो … Read more

नैसर्गिक सौन्दर्य से लुभाता रहा बस्तर

ममता तिवारी ‘ममता’जांजगीर-चाम्पा(छत्तीसगढ़)************************************** यात्रा वृतांत… मानव की मूल प्रकृति सदैव बंजारा या यायावर रही है। मानव एक स्थान पर अचल या स्थाई नहीं रह सकता, इसी प्रवृत्ति के वशीभूत वह आज पूरी धरती आकाश-पाताल छानते रहता है। और यही प्रवृत्ति जब कुलबुलाती है, तो हम सभी आज भी अपनी जिंदगी के जंजालों को कुछ दिन-सप्ताह-माह … Read more

महकती घाटी

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)*************************************** नाशिक से मुंबई जाना मेरे लिए किसी रोमांचक सफ़र से कम नहीं होता है। इसमें हर बार का मेरा अपना अलग-अलग रोमांचित कर देनेवाला अनुभव रहा है। सह्याद्री की मनोरम घाटियाँ, टेड़ी-मेड़ी नागिन-सी बल खाती सड़क और हर ऋतु में रोज बदलने वाला सह्याद्री का मौसम, सह्याद्री की रंग बदलती चोटियाँ … Read more

गाँव की साँझ

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)*************************************** इतवार को गाँव जाना हुआ, शाम को सोचा कि खेत पर चक्कर लगा लिया जाए। सांझ ढल रही थी, अस्ताचल का सिंदुरी सूरज आरक्त होकर पश्चिम की देहरी छू रहा था। मेड़ पर खड़े होकर मैंने देखा कि १०-१२ मयूरों की टोली अपने मस्तीभरे अंदाज में कटे हुए गेहूँ के खेत … Read more

जिन्दगी का ‘नया मोड़’

राधा गोयलनई दिल्ली****************************************** बचपन में मैं खाने की बेहद शौकीन थी। मेरी फ्रॉक की दोनों जेबें चिलगोजे, बादाम और किशमिश से भरी रहती थीं। मक्खन, घी और मलाई खाने की बेहद शौकीन थी, लेकिन जब चीन ने १९६२ में भारत पर आक्रमण किया तो जिंदगी ने एकदम नया मोड़ ले लिया।बचपन में महाराणा प्रताप की … Read more

परिवार की सांस्कृतिक प्रेरणा ‘अम्मा जी’

रश्मि लहरलखनऊ (उत्तर प्रदेश)************************************************** मेरी नई-नई शादी हुई थी। जीवन में पहली बार मैंने करवाचौथ का निर्जला व्रत रखा था। पूजा करने के लिए तैयार हुई तो अम्मा बार-बार मुझे देख कर बताती रहीं…” नथ पहनना ज़रूरी होता है। देखो बिन्दी तिरछी है, ठीक कर लो। कान वाले झाले काहे नहीं पहिने ?”उजबक ढंग से … Read more