हाँ, मैंने भी अंग्रेजी के नेमप्लेटों पर कालिख पोती थी…

प्रो. सुभाष शर्मामेलबोर्न****************************** आज मैं ऑस्ट्रेलिया के मेलबोर्न शहर में रहता हूँ। एक इंजीनियर हूँ; और ऑस्ट्रेलिया की एक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी में अंग्रेजी में पढ़ाता हूँ|  यहाँ रहते हुए हर काम अंग्रेजी मे करता हूँ। अंग्रेजी बोलता हूँ, अंग्रेजी पढ़ता हूँ और अंग्रेजी ही लिखता हूँ।आज यूँ ही बैठे-बैठे एक स्मृति-चित्र अचानक स्मृति पटल पर उभर … Read more

माँ की यादें

राधा गोयलनई दिल्ली*************************************** मुझे अपनी माँ की बहुत-सी बातें याद हैं। प्यार, हुनर, अक्लमंदी और सीख बहुत याद आती है। आज उन्हीं की शिक्षा के कारण हम ससुराल में अपने दायित्व को पूरी तरह से निभा पा रहे हैं। हमारी माँ को अपने सास-ससुर का प्यार कभी नहीं मिला। हमें कभी याद नहीं आता, कि … Read more

एक मुलाक़ात

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************************** जीवन में कब, कहाँ, किससे फिर से मुलाक़ात हो जाए, पता नहीं। मैं गर्मी की छुट्टियों के बाद अपने परिवार के साथ लखनऊ से जबलपुर जा रही थी। लखनऊ और कानपुर के बीच एक स्टेशन आता है- उन्नाव, जहाँ पर रेलगाड़ी थोड़ी देर रुकती है। अधिकतर उन्नाव में काम करने वाले लौटते … Read more

छोटे लोग, छोटी बातें

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************************** परिवार में जब कई सदस्य हों तो काम बढ़ ही जाता है। मुझे याद है मैं, मेरा भाई, दादी और मेरे चाचा और माँ-पापा, सब मिला कर छः लोग थे। माँ को पैरों में अक्सर दर्द हो जाता, बहुत भाग-दौड़ वाला काम नहीं कर पातीं थीं। वैसे जब तक सब घर में … Read more

बारिश बनी आफ़त

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* मई १९८३ की वह रात आज भी स्मृतियों में हूबहू जीवित है। अगले दिन बी.ए. ऑनर्स की परीक्षा थी। मैं पटना के राजेन्द्रनगर स्थित रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया के ऑफिसर्स क्वार्टर में ट्यूशन पढ़ाकर लौट रहा था। हाथ में रात के भोजन का टिफिन था और मन में परीक्षा … Read more

मेरे बाबू जी… आधार स्तंभ थे

पद्मा अग्रवालबैंगलोर (कर्नाटक)*********************************** मेरी असली प्रेरणा… आज मैं उम्र के छठे दशक में हूँ। मेरे बाबू जी वर्षों पहले भगवान को प्यारे हो चुके हैं। वह ज्यादा पढे नहीं थे, परंतु शिक्षा के महत्व को समझते थे। मैं अपने माता-पिता की ज्येष्ठ संतान हूँ, इसलिए लाड़-प्यार से मेरी झोली भरी हुई है। मेरे बाबू जी कड़क … Read more

पहला हार्ट अटैक

शीला बड़ोदिया ‘शीलू’इंदौर (मध्यप्रदेश )*********************************************** तब की-पैड वाले फोन का चलन था। शाम को मेरा फोन बजा, पापा ने कहा “मेरी तबियत खराब है, भाई को लेकर जल्दी वैशाली नगर चौराहा डॉ. व्यास के यहाँ आ जाओ।”मैंने पूछा,” क्या हुआ पापा ?”बोले, “बस तुम लोग जल्दी आ जाओ। “  भाई ने फटाफट बाइक निकाली और … Read more

बचपन और आम का स्वाद

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* बचपन की गर्मियाँ आज भी मन में मीठी स्मृतियों की तरह बसी हुई हैं। जैसे ही विद्यालय की छुट्टियाँ होतीं, मन खुशी से झूम उठता था। तपती दोपहरी में भी हमें कोई थकान नहीं होती थी, क्योंकि आम के बागों की सैर हमारा इंतज़ार कर रही होती थी।गाँव के … Read more

भयावह ‘कोरोना’ काल…

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* सन् २०२० से २०२१ का वह कालखंड मानव इतिहास के सबसे भयावह और त्रासद समयों में से एक बनकर मेरी स्मृतियों में अंकित हो गया है। दिल्ली जैसे महानगर में रहते हुए मैंने जो देखा, वह केवल एक महामारी नहीं थी-वह जीवन, व्यवस्था और मानवीय संवेदनाओं की कठोर परीक्षा … Read more

शहतूत का पेड़

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)********************************************* अबकी बार शहतूत का पेड़ झूमकर फूलों से लद गया था। हर टहनी, उपशाखाओं पर फूल ही फूल, ऐसा लग रहा था जैसे शहतूत ने फूलों के गजरे ही गजरे पहन लिए हैं। छोटे-छोटे अनगिनत फूलों ने शहतूत को जैसे लपेट लिया हो। वाह ! शहतूत बसंत का स्वागत करने का … Read more