पानी सदा अनमोल
डॉ.एन.के. सेठी ‘नवल’बांदीकुई (राजस्थान) ********************************************* नीर सदा अनमोल,समझें इसी का मोलजीवन का ये आधार,व्यर्थ न बहाइए॥ सूख गए नदी ताल,जीव सभी हैं बेहालअपने ही पाँवों पे न,कुल्हाड़ी चलाइए॥ कट रहे वृक्ष सभी,समय बचा है अभी,पर्यावरण सुरक्षा,सभी अपनाइए॥ प्रकृति से छेड़छाड़,करें नहीं मार-धाड़,प्राकृतिक जीवन को,जीवन्त बनाइए॥ बिना पानी सूना सब,बचेगा न कुछ अब,गलती सुधारें नर,इसी में … Read more