कहाँ चले जाते अपने…
हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ टूटते हैं सपने,ना जाने कहाँ चले जाते हैं अपनेरोते हैं हम दिन-रात,फिर भी नहीं आते हैं अपने। हर चेहरे पर नजरों की चाह ढूंढते हैं,तेरी यादों के सहारे कब तक! इंतजार करें हम,फिर भी नहीं आते हैं अपने। उम्मीदें बहुत सारी थी,पर हर किसी के चाहने से क्या होता हैवही … Read more