कहाँ चले जाते अपने…

हरिहर सिंह चौहानइन्दौर (मध्यप्रदेश )************************************ टूटते हैं सपने,ना जाने कहाँ चले जाते हैं अपनेरोते हैं हम दिन-रात,फिर भी नहीं आते हैं अपने। हर चेहरे पर नजरों की चाह ढूंढते हैं,तेरी यादों के सहारे कब तक! इंतजार करें हम,फिर भी नहीं आते हैं अपने। उम्मीदें बहुत सारी थी,पर हर किसी के चाहने से क्या होता हैवही … Read more

शब्दों का मेला

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* शब्द-शब्द है चेतना, शब्द-शब्द झंकार।मिले सृष्टि को जागरण, शब्द रचें आकार॥ शब्द विश्व का रूप है, शब्द बने उजियार।शब्द उच्च उर्जा लिए, मेटे हर अँधियार॥ शब्द ब्रम्ह हैं, ईश हैं, शब्द सकल ब्रम्हांड।शब्द रचें अध्याय नित, मानस के सब कांड॥ शब्द तत्व हैं, सार हैं, शब्द सृजन अभिराम।शब्द सतत गतिशील हैं, … Read more

वैशाखी आई

संजय वर्मा ‘दृष्टि’ मनावर (मध्यप्रदेश)******************************** फसल भरपूर हुई,वैशाखी आईखुशियों की सौगात लाई,वैशाखी आई। करे भांगड़ा हर कोई,वैशाखी आईत्यौहार की बढ़ी शान,वैशाखी आई। उत्साह उमंग के द्वार खोलने,वैशाखी आईदिलदार-मालदार बनाने,वैशाखी आई। दूर बसे अपने घर आने को,वैशाखी आईदुःख दूर करने को,वैशाखी आई। ऊपर वाले का शुक्रिया अदा करने को,वैशाखी आई।पंजाब की शान बढ़ाने कोवैशाखी आई। परिचय-संजय वर्मा … Read more

टूट रहे समरस वतन

डॉ.राम कुमार झा ‘निकुंज’बेंगलुरु (कर्नाटक) ************************************************* तुले तोड़ने चल पड़े, देश धर्म सद्भाव।ताल बजाते देख जन, काम क्रोथ मद घाव॥ टूट रहे समरस वतन, भाषा जाति समाज।कहाँ परस्पर मेल अब, कलह द्वेष आगाज॥ गहराती गर्मी कहर, लू बरसाता ताप।कहीं मौत बन आँधियाँ, कहीं गहन बरसात॥ कीचड़ में खिलते कमल, सहतेक्ष बहु दुर्गन्ध।धर्म जाति संघर्ष में, … Read more

दिन सलोने बचपन के…

संजीव एस. आहिरेनाशिक (महाराष्ट्र)****************************** उम्र के इस मोड़ पर आज जब पीछे मुड़ कर मैं देखता हूँ,बचपन की सुहानी यादों के पंछियों को चहकता पाता हूँ। कितनी-कितनी यादों के पंछी जम आए मन की टहनी पर,कैसे-कैसे फुदक रहे हैं देखो मन के गलियारों में इधर-उधर। वो मामा का गाँव सुहाना, वहाँ प्यारी-प्यारी सी नानी थी,बड़े … Read more

अंजनी कुमार हनुमान

सरोजिनी चौधरीजबलपुर (मध्यप्रदेश)********************************** अंजनी कुमार हनुमान सदा प्रिय राम दुलारे,महावीर बलवान सदा सब कष्ट निवारेहाथ वज्र और ध्वजा लिए प्रभु काज संवारें,जहाँ विराजें राम, वहाँ पर आप विराजें। विद्यावान सुजान सदा शुभ-मंगल करते,बल बुद्धि विद्या देकर सकल क्लेश हर लेतेराम काज कर सीता जी का पता लगाये,सभी सँवारे काम सियापति के मन भाये। लगी शक्ति … Read more

संविधान निर्माता पर है नाज

संजय सिंह ‘चन्दन’धनबाद (झारखंड )******************************** डॉ. भीमराव आम्बेडकर जयंती (१४ अप्रैल) विशेष… रोज-रोज ही दिखा रहे हैं संविधान की प्रतियाँ सब आज,खुशी हमें है याद कर रहे पक्ष- विपक्ष बाबा साहब को आजभारत वर्ष के संविधान निर्माता पर जन-जन को है नाज,शोषित, पीड़ित, आदिवासी के उत्थान का वर्णित गहरा ‘राज।’ करनी-कथनी भूल गए अब दिखा … Read more

एक अनजान पहेली…

डॉ. श्राबनी चक्रवर्तीबिलासपुर (छतीसगढ़)************************************************* कभी कालिमा,कभी उजियाराकभी लालिमा,कभी हरियाली। ये कैसी पहेली…!प्रकृति की अद्भुतआँख-मिचौनी,पल में सुंदर, पल में मैली। कभी नई नवेली,भीड़ में अकेलीबन जाए वो सहेली,थामकर उसकी हथेली। कभी ये रुलाए,कभी ये हँसाए।ज़िंदगी है हमारी,एक अनजान पहेली॥ परिचय- शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय में प्राध्यापक (अंग्रेजी) के रूप में कार्यरत डॉ. श्राबनी चक्रवर्ती वर्तमान में छतीसगढ़ … Read more

जय-जय हे! बजरंगबली

प्रो.डॉ. शरद नारायण खरेमंडला(मध्यप्रदेश)******************************************* हनुमान जयंती (१२ अप्रैल) विशेष… सदा सहायक देव प्रबलतम, परमवीर हनुमाना।संकटमोचन, शत्रु विनाशक, जय जय दयानिधाना॥ मातु अंजनालाल शौर्यमय, असुरों को संहारें।रामकाज करने को आतुर, पाप जगत के मारें॥सूर्य निगलकर बने अनूठे, वायुपुत्र देवंता।महावीर सुग्रीव सहायक,करें दुःखों का अंता॥भयसंहारक, मंगलकारी, पूजन बहुत सुहाना,संकटमोचन, शत्रु विनाशक, जय-जय दयानिधाना…॥ दहन करी लंका हे … Read more

वो बाप होता है…

ताराचन्द वर्मा ‘डाबला’अलवर(राजस्थान)*************************************** अंगुली पकड़कर चलना सिखा दे,वो बाप होता है,कांधे पर बिठा कर दुनिया दिखा दे,वो बाप होता है। फीस के लिए जो कभी रोने न दे,वो बाप होता है,खुद रो कर जो हँसना सिखा दे,वो बाप होता है। सारी कमाई जो बेटे पर लुटा दे,वो बाप होता है,बेटे को सफलता की जो दुहाई … Read more